झारखंड I सत्तारूढ़ दल भाजपा में संगठन के स्तर पर संवादहीनता की कमी को महसूस किया जा रहा था. इस कमी को दूर करने के लिए अब संगठन सक्रिय हुआ है. सरकार और संगठन के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए काम शुरू हो गया है.

झारखंड में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का एक बार फिर दौरा होने की संभावना है. मार्च में अमित शाह झारखंड आ सकते हैं. वे पंचायत स्तर के कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करेंगे. इसको लेकर भाजपा के प्रदेश संगठन में हलचल शुरू हो गई है. पिछले सितंबर में अमित शाह तीन दिन के प्रवास पर रांची आए थे. अमित शाह के निर्देश या यूं कहें कि टास्क को पूरा करने की एक चिंता है. साथ ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को सम्मान देने के लिए भी कहा गया था. लिहाजा सरकार के लोग और संगठन के बीच समन्वय की कवायद हो रही है. वैसे भाजपा के कई विधायक सरकार के कुछ निर्णय से नाखुश दिखे थे. स्थानीय नीति और इससे पहले सीएनटी एक्ट मामले से एक बड़ा समूह नाराज था. नेतरहाट की बैठक में भी कई विधायक नहीं गए.

भाजपा को मिशन 2019 की चुनौती की चिंता सता रही है. बूथ स्तर तक संगठन की इकाई को मजबूत किया जा रहा है. पार्टी का कार्यक्रम कई स्तर पर चल रहा है. राज्य के राजनीतिक माहौल और विपक्ष की चुनौती ने पार्टी को कई स्तर पर तैयारी करने को विवश किया है. सीएम रघुवर दास अब प्रमंडलों में कार्यकर्ता संवाद करने जा रहे हैं. नेतरहाट में कैबिनेट के बहाने भाजपा विधायकों की बैठक बुलाई गई थी. संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह भी नेतरहाट पहुंचे थे. लेकिन लगभग एक दर्जन से अधिक विधायक नदारद थे. भाजपा की केंद्रीय इकाई की नजर झारखंड पर है. विधायकों की नाराजगी के अलग-अलग मायने लगाए जा रहे हैं. कार्यकर्ताओं की अपेक्षा रहती है कि उन्हें सरकार के होने का अहसास होना चाहिए.

मिशन 2019 के लिए भाजपा ने संगठन के स्तर पर कई कार्यक्रम चला रखे हैं. कार्यक्रम तो हो रहा है, लेकिन शायद कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह की कमी महसूस की जाती रही है. हाल में केंद्रीय महामंत्री अनिल जैन का भी दौरा हुआ था. उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष के पिछले दौरा में दिए गए टास्क की समीक्षा की थी. सरकार और संगठन के बीच समन्वय पर जोर दिया था. अब देखना है कि सरकार और संगठन के बीच संवाद किस प्रकार मजबूत होता है.


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