पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने बुधवार को खुलासा किया कि उसने 1.77 अरब डॉलर (करीब 11,400 करोड़ रुपए) के घोटाले को पकड़ा है. इस मामले में आभूषण कारोबारी नीरव मोदी ने कथित रूप से बैंक की मुंबई ब्रांच से धोखाधड़ी वाला गारंटी पत्र (एलओयू) हासिल कर अन्य भारतीय ऋणदाताओं से विदेशी ऋण हासिल किया. इस मामले में बैंक ने अपने 10 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है.

इसी से जुड़े एक अन्य मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में हुई 280 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के संबंध में नीरव मोदी एवं अन्य के खिलाफ मनी लॉड्रिंग का मामला दर्ज किया है. यह मामला इस महीने की शुरुआत में दर्ज हुई सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर दर्ज किया गया है.

दरअसल, एलओयू वह पत्र है जिसके आधार पर एक बैंक द्वारा अन्य बैंकों को एक तरह से गारंटी पत्र उपलब्ध कराया जाता है जिसके आधार पर विदेशी शाखाएं ऋण की पेशकश करती हैं.

पीएनबी ने इस मामले में दस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. साथ ही मामले को जांच के लिए सीबीआई के पास भेज दिया है. वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने कहा कि यह एक अकेला मामला है और इससे अन्य बैंकों पर असर नहीं होगा.

बैंक ने कहा कि इन लेनदेन के आधार पर अन्य बैंकों ने संभवत: कुछ ग्राहकों को विदेशों में ऋण दिया है. हालांकि, पीएनबी ने इन बैंकों का नाम नहीं लिया. लेकिन समझा जाता है कि यूनियन बैंक आफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और एक्सिस बैंक ने पीएनबी के गारंटी पत्रों के आधार पर कर्ज दिया. विदेशी बैंक शाखाएं भी जांच के घेरे में हैं. इस घोटाले में कई बड़ी आभूषण कंपनियां मसलन गीतांजलि, गिन्नी और नक्षत्र भी विभिन्न जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गई हैं.
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