मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को विधानसभा में अपना दूसरा बजट पेश करेंगे. 2019 में लोक सभा चुनाव के मद्देनजर यह बजट काफी खास है. मुख्यमंत्री अपने बजट में जहां किसानी, खेती और रोजगार को तवज्जो दे सकते हैं. वहीं बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती प्रदान करने के लिए भी घोषणाएं हो सकती है. कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री अपने दूसरे बजट से बीजेपी के लिए 2019 की राह तैयार करेंगे. इसके लिए गरीब, किसान और बेरोजगार युवाओं को खास तवज्जो दी जा सकती है.
दरअसल देश के सबसे बड़े सूबे के आम बजट पर जनाकांक्षाओं और लोकसभा 2019 के चुनावों का बड़ा दबाव है. यूं तो बजट हर बार की तरह ज्यादा बड़े आकार में होगा, लेकिन इसके सामने योजनाओं को जमीन पर उतारने की बड़ी चुनौती भी होगी.
पिछली बार योगी सरकार ने जब अपना पहला बजट पेश किया था, तब संकल्प पत्र के वादों का उस पर भारी दबाव था. कर्जमाफी से लेकर वेतन आयोग की सिफारिशें खजाने पर भारी पड़ रही थी. पिछली बार सरकार ने 3.84 लाख करोड़ का बजट पेश किया था. इस बार भी बजट के भारी भरकम होने की उम्मीद की जा रही है. इस बार का बजट 4 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर सकता है.
यूपी के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल कहते है कि हमारा फोकस जनकल्याण हैं, हम जनता की उम्मीदों को पूरा करने आए हैं.
बजट का आकार जो भी हो, लेकिन इस पर अरुण जेटली के द्वारा संसद में पेश बजट की छाप जरूर दिखाई देगी. बजट में जनकल्याणकारी योजनाओं पर फोकस होगा, क्योंकि लोकसभा चुनावों की दृष्टि से आखरी बजट है और उत्तर प्रदेश लोकसभा की 80 सीटें देता है. लिहाज़ा जनता को लुभाने और विकास योजनाओं के जमीन तक पहुंचाने का योगी सरकार पर बड़ा दबाव है.



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