नासिक I महाराष्ट्र के नासिक से निकला करीब 30 हजार किसानों का जत्था रविवार को मुंबई पहुंच गया है. सोमवार को किसान मुंबई में बड़ा प्रदर्शन करने वाले हैं. कर्जमाफी और उचित मूल्य की मांग कर रहे किसानों की योजना महाराष्ट्र विधानसभा घेरने की है. प्रदर्शन कर रहे किसानों को कांग्रेस, शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का समर्थन मिला है. आरएसएस ने भी राज्य सरकार से इस मुद्दे के समाधान की मांग की है.
किसानों के प्रदर्शन के बीच रविवार रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने आवास वर्षा में एक हाई लेवल मीटिंग ली. इस बैठक में किसानों के मुद्दों पर विचार के लिए फडणवीस ने 6 सदस्यीय कमिटी का गठन किया है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसानों की मांगों के प्रति सकारात्मक रहें. हाई पावर कमिटी में गिरीश महाजन, चंद्रकांत दादा पाटिल, सुभाष देशमुख, पांडुरंग फुंडकर, विष्णु सावरा और एकनाथ शिंदे शामिल हैं.
एआईकेएस के महासचिव अजीत नवाले ने कहा कि 180 किलोमीटर लम्बी पदयात्रा की शुरुआत लगभग 12,000 किसानों के साथ हुई थी और अब यह संख्या 30,000 तक पहुंच गई है. उन्होंने कहा कि किसानों के बीच बढ़ते असंतोष की इस बात से समझा जा सकता है.
फॉरेस्ट एक्ट लागू करने की मांग
एक किसान नेता ने कहा कि ये मुद्दा सिर्फ किसानों का नहीं है बल्कि इसमें आदिवासियों का भी अधिकार निहित है. फॉरेस्ट एक्ट 2005 में आया लेकिन आदिवासियों को उनकी ज़मीन का अधिकार नहीं मिला, अभी भी लाखों किसानों की ज़मीने जंगलों के बीच में हैं, ये ज़मीनें उनके पूर्वजों की हैं लेकिन फिर भी उन ज़मीनों का मालिकाना हक उन्हें नहीं मिला है, कानून इनके साथ है तब भी वे परेशानी क्यों उठाएं?
दूसरी अहम मांगों में स्वामीनाथन कमिटी की सिफारिशें लागू करने की मांग, न्यूनतम समर्थन मूल्य को बेहतर करने की मांग और बूढ़े किसानों को पेंशन की मांगें शामिल हैं.
लगभग 150 किलोमीटर की यात्रा 5 दिनों में तय करते हुए महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से हजारों किसान 6 मार्च को नासिक पहुंचे. योजना के अनुसार रविवार को किसान मुलुंड चेक नाका से मुंबई में प्रवेश करेंगे. घाटकोपर में रुककर वहां खाना खाएंगे इसके बाद आगे बढ़ते हुए सोमइया कॉलेज ग्राउंड जाएंगे. सोमवार सुबह से राज्य विधानसभा की ओर बढ़ेंगे जहां सत्र चल रहा होगा, इसके बाद किसान विधानसभा का घेराव करेंगे.
जब तक सरकार किसानों से बातचीत की पहल नहीं करती तब तक महाराष्ट्र में गतिरोध बना रहेगा. फिलहाल सरकार की तरफ से किसान प्रदर्शनकारियों से कोई औपचारिक बातचीत नहीं की गई हैं.



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