झारखंड में सरकारी आयोगों का खस्ताहाल है. कहीं कर्मचारी नहीं है, तो कहीं आयोग में अध्यक्ष-सचिव के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं. ऐसे में इन आयोगों में कामकाज प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन इसकी सूध लेना वाला कोई नहीं.
बात विधि आयोग की करें तो यह कंट्रैक्टकर्मियों के भरोसे चल रहा है. जबकि लंबे समय से आयोग के पास ना तो अधयक्ष है और ना ही सचिव. यहां के कर्मी दोनों पदों के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए हैं.
यह स्थिति सिर्फ विधि आयोग की ही नहीं है बल्कि सूचना आयोग, मानवाधिकार आयोग समेत आधा दर्जन आयोगों में कर्मचारियों और सदस्यों के टोटे हैं. सूचना आयोग में तो सदस्य और अध्यक्ष के 10 पदों में से 8 पद खाली हैं. वर्तमान में सूचना आयोग एक अध्यक्ष और एक सदस्य की बदौलत कई महीनों से चल रहा है.जबकि कर्मचारियों की किल्लत से काम नहीं होने के कारण आयोग में हजारों केस लंबित पड़े हैं.
ताज्जूब की बात यह है कि सदस्य के मनोनयन के लिए समाज कल्याण विभाग ने कई महीने पहले विज्ञापन प्रकाशित कर आवेदन भी मंगवाये, मगर उन आवेदनों पर कोई पहल नहीं हुई. ऐसे में बिना कर्मचारी के सूबे के ये आयोग महज दिखावे की संस्था बनकर रह गये हैं.



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