हजारीबाग। मां तो मां होती है, कैसे छोड़ देतीं। उसे ससम्मान अंतिम गति देने के लिए बेटी और दो बहुएं मजबूत कदमों के साथ सामने आ खड़ी हुईं। इसके बाद बेटी, दोनों बहुएं व एक बहू का भाई 75 वर्षीया सबिया देवी के पार्थिव शरीर को कांधा देकर श्मशान ले गए, जहां अंतिम संस्कार किया गया। इधर, महिलाओं द्वारा अर्थी को कांधा देने का नजारा ग्रामीण देखते रहे, लेकिन कोई भी उनकी मदद को आगे नहीं आया। सबिया देवी हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के करगालो गांव की निवासी थीं। उनके पति पोखन साव चलने-फिरने से लाचार हैं। उनके दो बेटे हैं, जो वर्षों पूर्व काम करने बाहर गए थे, लेकिन आज तक घर नहीं लौटे। उनका कोई अता-पता नहीं है।
इसलिए गांव वालों ने नहीं दिया कांधा
पोखन साव के बड़े बेटे रेवतलाल साव 15 वर्ष पहले गांव से बाहर काम करने गए थे। रेवतलाल के छोटे भाई गांगो साव करीब आठ साल पहले काम करने के लिए निकले थे। दोनों भाई आज तक घर नहीं लौटे हैं। घर वालों को यह भी नहीं पता कि वे कहां काम करने गए थे, राज्य से बाहर तो नहीं चले गए थे। जब दोनों भाई घर नहीं लौटे, तो घर की पूरी जिम्मेदारी दोनों बहुओं पर आ गई।
इसके बाद ये दोनों महिलाएं घर चलाने के लिए काम करने लगीं, क्योंकि उनके श्वसुर चलने-फिरने से लाचार हैं। बहुओं का काम करना गांववालों को नागवार गुजरा और इस कारण वे इस परिवार से कटे-कटे रहने लगे। आज जरूरत पडऩे पर भी वे सहायता के लिए आगे नहीं आए। यहां तक कि सूचना देने पर भी इक्के-दुक्के रिश्तेदार ही पहुंचे। जैसे, सबिया की बेटी हेमंती देवी तो आ गईं, लेकिन उनका परिवार नहीं आया।
बेटी ने बहुओं से कहा, चलो हम ही कांधा दें
सबिया देवी की मृत्यु शुक्रवार की रात में हो गई थी। मौत की सूचना देने के बाद भी इक्के-दुक्के रिश्तेदार आए, जिसमें ज्यादातर महिलाएं ही थीं। इनमें सबिया की बेटी हेमंती देवी भी शामिल थीं। इधर, अंतिम यात्रा में पार्थिव शरीर को कांधा देने के लिए कम से कम चार लोगों की जरूरत थी। लेकिन, चार पुरुष उपलब्ध नहीं थे। इस पर हेमंती ने दोनों बहुओं उर्मिला देवी व अंबिया देवी कहा कि चलो हम लोग ही कांधा देते है। इसके बाद वहां उपलब्ध एकमात्र पुरुष बड़ी बहू उर्मिला देवी के भाई टुकन साव के साथ तीनों महिलाएं सबिया देवी के पार्थिव शरीर को श्मशान पहुंचाया। वहां मुखाग्नि सबिया के पति पोखन साव ने दी।
बड़ा बेटा 15 वर्ष पूर्व कमाने गया, नहीं लौटा
सबिया देवी की बड़ी बहू उर्मिला ने बताया कि उसके पति रेवतलाल साव 15 वर्ष पूर्व कमाने के लिए घर से गए थे। उस समय उनकी बेटी सबिता कुमारी दो साल की थी एवं चार माह का एक बेटा था। अब बच्चे बड़े हो गए हैं, लेकिन पति लौटकर नहीं आए। छोटी गोतनी (देवरानी) अंबिया के पति गांगो साव आठ साल पहले कमाने गए थे। वे भी आज तक घर नहीं लौटे हैं।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours