कश्मीर के राजौरी जिले में पाकिस्तान की फायरिंग में एक कैप्टन सहित चार भारतीय सैनिकों के मारे जाने को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने यह मामला उठाते हुए कहा कि पिछले एक साल में जितने भारतीय सैनिक मरे हैं उतने कभी नहीं मरे.
समाजवादी पार्टी भी इस मामले पर बीजेपी के विदेश नीति की आलोचना कर रही है. समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल ने कहा, 'मैं नहीं समझ पा रहा हूं कि सरकार इस तरह से डरी हुई क्यों है. जब कुलभूषण जाधव का मामला हुआ था, तब हमारी पार्टी ने मजबूती से सरकार का साथ दिया था. लेकिन अब हर दिन हमारे सैनिक मारे जा रहे हैं.'
नरेश अग्रवाल का सवाल- कहां गया 56 इंच का सीना?
नरेश अग्रवाल ने सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा कि अब कहां गया 56 इंच का सीना? उन्होंने पूछा कि हमारे गृह मंत्री रोज कहते हैं कि पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा लेकिन उसके बावजूद लगातार हमारे सैनिक मर रहे हैं. बीजेपी सरकार के आने के बाद से अब तक हजार से ज्यादा सैनिक मर चुके हैं और इतने सैनिक तो युद्ध में भी नहीं मरते. नरेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार की विदेश नीति पूरी तरह से फेल है.
'पाकिस्तान में सरकार नाम की कोई चीज नहीं'
हमें ये बात समझ लेनी चाहिए कि पाकिस्तान में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है और जो सेना चाहती है, वहां वही होता है फिर क्यों हम पाकिस्तान से बातचीत की कोशिश करते हैं. साथ ही उन्होंने भी ये कहा कि अगर सरकार पाकिस्तान के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करती है तो हमारी पार्टी पूरी तरह से सरकार का साथ देगी.
संजय सिंह बोले-सैनिकों की शहादत का जवाब दे सरकार
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी सैनिकों की शहादत के लिए BJP सरकार की ढुलमुल नीति को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि कभी तो हम जरूरत से ज्यादा उदारवादी रवैया अपना लेते हैं, बिना बुलाए नवाज शरीफ के जन्मदिन में चले जाते हैं और कभी कहते हैं कि उनसे बातचीत तक नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की पाकिस्तान को लेकर कोई ठोस नीति है ही नहीं.
संजय सिंह का कहना है कि सरकार की इसी नीति के वजह से पाकिस्तान का हौसला बढ़ता जा रहा है. कभी हमें पाकिस्तान आंख दिखा रहा है तो कभी चीन आंख दिखा रहा है. हमारे सैनिक लगातार शहीद हो रहे हैं उनकी शहादत को नमन है, लेकिन सरकार को इस शहादत का जवाब देना होगा.



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