प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया परियोजना कोल्हान के 'हो आदिवासी समाज' के कलाकारों के लिए एक वरदान बन कर सामने आई है. अब वे डिजिटल इंडिया के माध्यम से अपने हो आदिवासी समाज की कला-संस्कृति,नृत्य-गीत, परंपरा, संस्कार, रीति-रिवाज से पूरी दुनिया को न सिर्फ अवगत करा सकेंगे, बल्कि वे इसे अपने रोजी-रोजगार का साधन भी बना सकेंगे. कोल्हान के आदिवासी हो समाज के नृत्य और गीत पर आधारित पहले एल्बम को पूर्व सीएम मधू कोड़ा ने रविवार को रिलीज किया.
इस अवसर पर आदिवासी हो समाज के कलाकार और बुद्धिजीवी भी मौजूद रहे. पूर्व सीएम ने पीएम नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया की तारीफ करते हुए कहा कि उनका समाज कला-संस्कृति के मामले में काफी आगे है, लेकिन इसकी गूंज दूर तक नहीं जा पा रही थी.
अब डिजिटल इंडिया हमारे समाज की कला-संस्कृति को बढावा देने में बहुत मददगार साबित होगी. पूरी दुनिया के लोग भी हमारे समाज के रीति-रिवाज, गीत-संगीत और परंपरा से अवगत होंगे. हो समाज के कलाकार भी अपनी प्रतिभा राष्ट्रीय मंच तक ले जा सकेंगे. जिसका लाभ आने दिनों में हो समाज के लोगों और कलाकारों को मिलेगा.
स्थानीय कलाकार और आदिवासी समाज के युवा भी इस एल्बम के रिलीज होने से बेहद खुश हैं.
गौरतलब है कि झारखंड और उडीसा के सीमावर्ती कई जिलों में आदिवासी हो समाज की काफी जनसंख्या है. इस समाज के युवा वर्ग दूसरे समाज के क्षेत्रीय भाषाओं के गीत-संगीत के एल्बम को देख अपने समाज के भी एलबम बनाने का सपना संजोये थे. जो अब पूरा हुआ है. अब वे अपने मोबाइल पर अपने समाज का एल्बम देख सकेंगे.
इस अवसर पर आदिवासी हो समाज के कलाकार और बुद्धिजीवी भी मौजूद रहे. पूर्व सीएम ने पीएम नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया की तारीफ करते हुए कहा कि उनका समाज कला-संस्कृति के मामले में काफी आगे है, लेकिन इसकी गूंज दूर तक नहीं जा पा रही थी.
अब डिजिटल इंडिया हमारे समाज की कला-संस्कृति को बढावा देने में बहुत मददगार साबित होगी. पूरी दुनिया के लोग भी हमारे समाज के रीति-रिवाज, गीत-संगीत और परंपरा से अवगत होंगे. हो समाज के कलाकार भी अपनी प्रतिभा राष्ट्रीय मंच तक ले जा सकेंगे. जिसका लाभ आने दिनों में हो समाज के लोगों और कलाकारों को मिलेगा.
स्थानीय कलाकार और आदिवासी समाज के युवा भी इस एल्बम के रिलीज होने से बेहद खुश हैं.



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