राज्य सरकार के खिलाफ आदिवासी संगठनों ने आर-पार की लड़ाई लड़ने की घोषणा की है. हरमू मैदान में आयोजित आक्रोश रैली में तेली और कुर्मी को एसटी बनाने की अनुशंसा का विरोध कर रहे आदिवासियों ने सरकार पर जमकर निशाना साधा और किसी भी सूरत में इसे लागू नहीं होने देने की घोषणा की.
राजधानी रांची के हरमू मैदान में पारंपरिक हथियारों से लैश हजारों आदिवासी रघुवर सरकार के खिलाफ गोलबंद हुए. आदिवासी आक्रोश महारैली के जरिए आदिवासी संगठनों ने तेली और कुर्मी को एसटी में शामिल होने की कोशिश पर विरोध जताते हुए सरकार के खिलाफ जमकर हुंकार भरी. जल जंगल और जमीन के नारों के साथ आदिवासी युवाओं ने पत्थलगढी से लेकर सरकार द्वारा जमीन छिनने की कोशिश पर नाराजगी जताते हुए आर पार की लड़ाई लड़ने की बात कही.
जय आदिवासी युवा शक्ति के बैनर तले आयोजित इस आक्रोश महारैली को बगैर कोई राजनेता के आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया. कुर्मी और तेली के बहाने आदिवासियों ने जहां राजनीतिक दलों और नेताओं की जमकर आलोचना की वहीं भाजपा और आजसू पर भी निशाना साधते हुए आगामी चुनाव में उन्हें सबक सिखाने की घोषणा की.
आदिवासियों का यह आक्रोश अब सड़क पर उतरने लगा है. विभिन्न राजनीतिक दलों के 42 विधायक और 2 सांसदों के लिखित अपील के बाद सरकार ने कुर्मी और तेली को एसटी में शामिल करने की पहल की है. जाहिर तौर पर यदि निर्णय हो जाता है तो स्वभाविक रूप से एसटी को मिलने वाले आरक्षण लाभ के दायरे में ये दोनों जाति भी शामिल हो जाएंगे. बहरहाल 2019 से पहले शुरू हुए इस विरोध के स्वर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.



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