झारखंड में उपभोक्ताओं को बिजली का बड़ा झटका लगा है. ऊर्जा विकास निगम के प्रस्ताव को संशोधित कर विद्युत नियामक आयोग ने इसे स्वीकृत कर दिया है. इससे घरेलू उपभोक्ता समेत अन्य उपभोक्ता वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ा है. वैसे सरकार ने सब्सिडी देने का आश्वासन दिया है. लेकिन बड़ा सवाल है कि किन उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिलेगी,यह तय नहीं है. सब्सिडी सीधे उपभोक्ता के बिल में मिलेगी. नई बिजली दर 1 मई से लागू होगी.

ऊर्जा विकास निगम के प्रस्ताव पर विचार करने के बाद झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने स्वीकृति दी है. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा विकास निगम ने 7 रुपये प्रति यूनिट का प्रस्ताव रखा था. नियामक आयोग ने मंथन के बाद इसे 5 रुपये 50 पैसे कर दिया है. नियामक आयोग को सरकार ने सूचित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को उनके बिजली बिल पर सब्सिडी दी जाएगी. विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने कहा है कि सब्सिडी मिलने के बाद कुछ बोझ कम हो जाएगा. पर सब्सिडी सभी उपभोक्ताओं को मिलेगी या नहीं,यह स्पष्ट नहीं है.

नियामक आयोग ने शहरी हो या ग्रामीण सभी वर्ग के उपभोक्ताओं पर कमोवेश बोझ डाला है. फिक्स्ड चार्ज को भी मंजूर कर दिया गया है.

घरेलू उपभोक्ता वर्ग


ग्रामीण उपभोक्ता-  4.40 रु (पूर्व में 1.25 रु था) प्रति यूनिट- फिक्स्ड चार्ज 20 रु (पूर्व में 16 रु था)
शहरी उपभोक्ता- 5.50 रु (पूर्व में 3 रु था) प्रति यूनिट- फिक्स्ड चार्ज- 75 रु (पूर्व में 50 रु था )

सिंचाई और कृषि कार्य करने वाले उपभोक्ता

5 रु प्रति यूनिट (70 पैसा पूर्व में) -200 यूनिट तक-फिक्स्ड चार्ज-20 रुपया

कामर्सियल उपभोक्ता

5.25 रु प्रति यूनिट (2.20 रू पूर्व में था)

इंडस्ट्रियल-लो टेनशन डिमांड बेस्ड में दर घटा दी गई है. हाई टेन्शन में स्पेशल सप्लाई की दर में 50 पैसे प्रति यूनिट दर घटा दी गई है. रेलवे को दी जाने वाली बिजली की दर घटा दी गई है. यह पहले 6 रुपये थी. अब यह 4.60 रूपया प्रति यूनिट हो गई है. राज्य विद्युत नियामक आयोग के तकनीक सदस्य रवींद्र नारायण सिंह  का कहना है कि ऊर्जा विकास निगम ने कई मांगें रखीं, लेकिन सोच समझ कर इसे स्वीकृति दी गई है.

दरअसल,ऊर्जा विकास निगम को राज्य सरकार हर साल लगभग 2000 करोड़ रुपये तक सहायता राशि देती रही है. अब सरकार इसे बंद कर दी है. ऊर्जा विकास निगम ने 2018-19 में अनुमानित घाटा 1785.40 करोड़ रुपये है. औसतन नियामक आयोग ने 43 प्रतिशत बिजली दर में बढ़ोतरी की है. महंगाई की मार झेल रहे उपभोक्ताओं का खर्च और बढ़ा है.
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