संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने शुक्रवार को सिविल सेवा परीक्षा 2017 के रिजल्ट जारी कर दिए. इस परीक्षा में हैदराबाद के डुरीशेट्टी अनुदीप ने टॉप किया है. वहीं बिहार के सहरसा के रहने वाले सागर कुमार झा ने इस परीक्षा में 13वां स्थान हासिल किया है.
सागर कुमार ने न्यूज 18 हिंदी से बात करते हुए कहा कि ये मेरा तीसरा प्रयास था और पहले दो प्रयास में मैं प्रीलिम्स में सफल नहीं हो सका था लेकिन मुझे अपने ऊपर भरोसा था लिहाजा मेहनत जारी रखी और रिजल्ट आपके सामने है.
सागर कुमार झा की स्कूलिंग रांची डीपीएस से हुई है इसके बाद सागर ने बीएचयू आईआईटी से कम्प्यूटर साइंस में बीटेक किया और फिलहाल एक कंपनी में रिसर्च के पद पर तैनात हैं.
सागर ने यूपीएस एग्जाम में 13वीं रैंकिग हासिल की है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पुलिस सेवा को प्राथमिकता दी हैं. उन्होंने कहा कि शुरु से उन्हें पुलिस सेवा से लगाव रहा हैं. 2016 में यूपीएससी की सेंट्रल आर्मड पुलिस फोर्स परीक्षा में उन्हें पहला स्थान हासिल हुआ था.
सागर को इस सेवा में जाने के लिए मामा और जीजा से प्रेरणा मिली. सागर के मामा भागेश्वर झा इंडियन पुलिस सेवा में है जबकि जीजा रविश रंजन डिविजनल मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर तैनात हैं. सागर का कहना है कि पुलिस सेवा में रहकर वो वुमेन सेफ्टी के लिए काम करना चाहते हैं.
सागर कुमार झा बिहार से सहरसा जिले के कहरा ब्लॉक के चैनपुर गांव के रहने वाले हैं और इनके पिता मिहिर कुमार झा पाकु़ड़ में ब्लॉक कोऑपरेटिव अफसर के पद पर तैनात हैं. यूपीएससी में सागर का सब्जेक्ट मैथेमेक्टिस था. सागर को 10वीं में मैथ में 100 में 100 और 12वीं में 98 फीसदी मार्क्स हासिल हुए थे. सागर का कहना है कि कोचिंग की जरूर सहायता ली लेकिन सफलता में खुद से स्टडी का सबसे ज्यादा योगदान है.
बेटे की सफलता पर सागर की मां सबीता झा ने कहा कि चार साल पहले जब उनके बेटे ने आईआईटी की परीक्षा पास की तब से ही उन्हें लग रहा था उनका बेटा ऊंचाइयों को छुएगा. वह उसी समय से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी करने लगा था. लाइब्रेरी में जाकर पढ़ाई किया करता था. सागर की मां ने आगे कहा कि पढ़ाई के अलावा उनके बेटे को गीत संगीत में भी काफी रुचि है. वह हार्मोनियम भी अच्छा बजाता है.
वहीं पिता मिहिर कुमार झा ने कहा कि सागर उनके तीन बच्चों में सबसे छोटा है. उसने पहली बार में ही आईआईटी की परीक्षा पास कर ली थी. उसने बीएचयू में पढ़ाई की. फिर उसका सैम्सन कंपनी में चयन हो गया. मगर तीन-चार माह काम करने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने लगा.
पिता ने आगे कहा कि बेटे की सफलता से उनका पूरा परिवार काफी खुश है. उन्होंने कहा कि मेरी अभिलाषा थी कि मेरा बच्चा सिविल सेवा में जाए. मेरे बेटे को उसकी कठिन मेहनत का फल मिला है. भांजे की सफलता पर मामा अमित ठाकुर ने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में उसने 13वां स्थान लाया है. उसकी सफलता से हम सभी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सागर शुरू से ही असाधारण छात्र रहा है. वह हर परीक्षा में टॉप करता रहा है. आईएएस बनने के जुनून में उसने अच्छी नौकरी छोड़ दी. उसे अपने ऊपर पूरा विश्वास था. आज वह आईएएस बन गया.



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