लोहरदगा झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास प्रदेश में बाल मजदूरी नहीं होने के लाख दावे क्यों न कर ले, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है. आपको बता दें कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'पेशरार एक्शन प्लान' को धरातल पर उतारने का काम बाल मजदूर से ही कराया जा रहा है.

दरअसल, लोहरदगा से पेशरार तक बनने वाली सड़क निर्माण और गार्डवाल निर्माण कार्य में बड़ी संख्या में बाल मजदूर कार्य कर रहे हैं. महीनों से यहां खुलेआम बाल मजदूरी हो रही है, जिस पर सरकार का कोई ध्यान नहीं जा रहा है. बता दें कि इसमें 10 वर्ष तक की बच्चियां जी तोड़ मेहनत कर रही हैं. इनसे कम मजदूरी में ज्यादा से ज्यादा काम लिया जा रहा है. यह काम शिवालय कंस्ट्रक्शन द्वारा कराया जा रहा है.

वहीं इसमें जिला प्रशासन पूरी तरह जहां मौन है, तो श्रम अधीक्षक ने जांच के नाम पर कुछ कहने से ही मना कर दिया है. इन सबके बीच पेशरार तक बनने वाली इस सड़क में न तो कंपनी का कोई अधिकारी दिखाई दे रहा है और ना ही किसी इंजीनियर की मौजूदगी है.

पेटी कॉन्ट्रैक्ट में काम लेने वाले ठेकेदार अपने अनुभव के आधार पर कार्य को धरातल पर उतारने की दिशा में काम कर रहे हैं. इसी का नतीजा है कि ज्यादा बचत की चाहत में पेटी कॉन्ट्रैक्ट खुलेआम छोटे-छोटे बच्चों से बाल मजदूरी करा रहे हैं. इससे कंपनी का कमीशन तो बच रहा है, लेकिन धरातल पर सरकार के नियमों की धज्जियां जरूर उड़ रही हैं.



इधर, पूछे जाने पर बाल मजदूरी को लेकर कोई अधिकारी कुछ भी कहने से साफ इंकार कर रहा है. वहीं काम के बाद इन बच्चियों को क्या मजदूरी मिलेगी ये भी उन्हें ठीक से नहीं पता है.
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