रांची झारखंड की राजधानी रांची के अस्पताल राजेंद्र इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्‍स) में मरीजों के साथ बड़ी लापरवाही हो रही थी. सूबे के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में मरीजों को भी नर्स नहीं, बल्कि वहां तैनात सुरक्षा गार्ड इंजेक्शन और दवाएं देते हैं. आरोप है रविवार को मेडिसिन विभाग के डॉ. उमेश प्रसाद की यूनिट में भर्ती 70 वर्षीय एक महिला की गलत इंजेक्शन लगाने से मौत हो गई. आरोप है कि सिस्टर इंचार्ज के कहने पर गार्ड मरीजों को इंजेक्शन लगाता था.

रिपोर्ट के मुताबिक 70 वर्षीय महिला मरीज की मौत के बाद अस्पताल में मृतका के परिजनों ने खूब हंगामा किया और आरोपी गार्ड के साथ मारपीट भी की है. गलत इंजेक्शन लगाने वाले आरोपी सुरक्षा गार्ड का नाम प्रवीण कुमार ओझा बताया जा रहा है. घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने करीब एक घंटे तक हंगामा किया. मौके पर पहुंची बरियातू पुलिस ने उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों को शांत कराया. वहीं, घटना की जानकारी मिलने के बाद रिम्स प्रबंधन ने गार्ड प्रवीण कुमार झा को बर्खास्त कर दिया है और सोमवार को यूनिट इंचार्ज सिस्टर से शो-कॉज नोटिस भेजा जाएगा.

बताया जाता है डायबिटीज और फीवर से पीड़ित 70 वर्षीय मृतका कमला देवी को मंगलवार को रिम्स में भर्ती कराया गया था और वह डॉ. उमेश प्रसाद के वार्ड में बेड नं. 14 पर भर्ती थी. वार्ड में तैनात गार्ड प्रवीण कुमार ओझा वार्ड में भर्ती मरीजों को इंजेक्शन आदि देता था और वही मृतका कमला देवी को भी पिछले दो दिनों से इंजेक्शन लगा रहा था. गत शनिवार रात भी गार्ड ने ही मृतका को इंजेक्शन लगाया था, लेकिन परिजनों ने आपत्ति जताने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई तो परिजन चुप हो गए.



जानकारी के मुताबिक रविवार को करीब दो बजे कमला देवी की तबीयत एकाएक काफी बिगड़ गई और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई. मरीज की अचानक हुई मौत से परिजन बेहद आक्रोशित हो गए और गार्ड को पकड़कर उसकी जमकर पिटाई कर दी. बाद में अस्पताल परिसर में हंगामा होता देखकर मौके पर अन्य गार्ड पहुंचे और गार्ड को परिजनों से छुड़ाकर ले गए. बताया जा रहा है घटना के बाद आरोपी गार्ड मौके से फरार है.

वहीं, वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों के परिजनों ने बताया कि इंजेक्शन देने से लेकर स्लाइन लगाने तक का काम गार्ड प्रवीण कुमार ओझा ही करता था. उन्होंने बताया कि कई बार मामले की शिकायत भी सिस्टर से भी गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला. मरीजों के परिजनों ने बताया कि वार्ड की सिस्टर के कहने पर ही सुरक्षा गार्ड मरीजों को सुई लगाता था. परिजन इसलिए चुप रहते थे, क्योंकि समय पर मरीजों को इंजेक्शन और दवाएं मिल जाती थीं.
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