मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने को लेकर रिम्स परिसर में प्रोटेस्ट मार्च निकाला गया. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विस एसोसिएशन, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन, पारा मेडिकल कर्मी व एमबीबीएस स्टूडेंट्स ने इस में भाग लिया. प्रदर्शनकारियों ने जोरदार तरीके से नारेबाजी कर सरकार के कानों तक अपनी मांगों को पहुंचाने की जोरदार कोशिश की. झारखंड में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट की मांग डॉक्टरों द्वारा लंबे अर्से से की जा रही है.
आंदोलन का ही नतीजा देखने को मिला था कि सरकार ने चिकित्सकों की बात मानते हुए इसे विधानसभा के पटल पर लाने की बात कही थी. लेकिन उसके बाद प्रस्ताव को सरकार द्वारा ठंडे बस्ते में डाल देने के बाद एक बार फिर डॉक्टर आंदोलन पर उतर आए हैं. सरकार के प्रस्ताव की उपेक्षा की प्रतिक्रिया गुरुवार को रिम्स परिसर में देखने को मिली.
गुरुवार को डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट्स ने एक साथ अपना विरोध दर्ज कराते हुए रिम्स परिसर में प्रोटेस्ट मार्च निकाला और जोरदार नारेबाजी की. डॉक्टरों का कहना है कि जब ये एक्टदेश के 18 राज्यों में लागू है तो झारखंड सरकार इसे कैसे नकार रही है. वहीं रांची की जानी मानी नेत्र चिकित्सकों का कहना है कि इस एक्ट के लागू होने से डॉक्टरों को सुरक्षा की गारंटी मिलेगी, जिसके बाद वे बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दे पाएंगे.
वहीं आईएमए अध्यक्ष ने कहा अगर सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती तो आने वाले दिनों में वे जोरदार आंदोलन करेंगे. एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्रों ने भी इस आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और कहा कि कड़ी मशक्कत के बाद वे डॉक्टर बनते हैं लेकिन उसके बाद जरा सी गलती पर मरीजों के परिजन से पिटाई खानी पड़ेगी, जो ठीक नहीं. वहीं झासा सचिव ने भी कहा कि अगर सरकार को एक्ट में कोई संशोधन करना है तो चिकित्सकों से सलाह मश्वरा कर संशोधित भी कर सकती है.



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