किसान परिवार में जन्मे बाबूधन मुर्मू को कौन नहीं जानता। किसी को यदि मदद की आवश्यकता होती तो वह बाबूधन मुर्मू को जरूर याद करता है। करे भी क्यों नहीं अपने क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण इनको सब लोग जानते हैं। इंटरमीडिएट करने के बाद वर्ष 2000 में अपने करियर को बिजनेस से शुरुआत की। उसमें अच्छी सफलता मिलने के बाद इन्होंने वर्ष 2007 में राजनीतिक के क्षेत्र में कदम रखा। इसके बाद वर्ष 2009 में बाबूधन मुर्मू ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद प्रदेश कमेटी सदस्य युवा मोर्चा चुने गए। इसके बाद मानो सफलता इनकी कदम चुमने लगी। पाकुड़ एसटी मोर्चा के जिला अध्यक्ष, एसटी मोर्चा प्रदेश कार्य समिति सदस्य चुने गए। इसके बाद बाबूधन मुर्मू ने 2010 में पहली बार जिला परिषद बने। इसके बाद वर्ष 2016 में दूसरी बार जिला परिषद सदस्य मनोनीत हुए। यह सब इनकी अच्छी सामाज सेवा के रूप में मिलते गया। जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में बाबूधन मुर्मू ने पूर्व जिप अध्यक्ष गेमिलिना सोरेन को 6 के मुकाबले 11 मताें से हराया। पाकुड़ नगर परिषद और बड़हड़वा नगर पंचायत चुनाव में जीत दर्ज कर अपने आपको साबित कर दिया कि समाज सेवा करना कितना अच्छा काम है।
मददगार के रूप में जाने जाते हैं बाबूधन मुर्मू
आए दिन गरीबों के बीच जाना इनकी आदत सी हो गई है। उनकी मदद किए बगैर यह दिन का लंच करना उचित नहीं समझते हैं। किसी की शादी समारोह हो या दुख की घड़ी हो बाबूधन मुर्मू जरूर दरवाजे तक पहुंचते हैं। साथ ही बाबूधन मुर्मू बताते हैं कि मेरा लक्ष्य ही है दो गांवों में प्रतिदिन घूमकर अपने लोगों की मदद करना।
नाम नहीं छापने की शर्त पर संथाल के एक सर्वे टीम ने बताया कि पंचायत दर पंचायत हर समुदाय के लोगों से बात कर एक अच्छे नेता की पहचान बताया गया है। इसमें बाबूधन मुर्मू के बारे में क्या कहते हैं लोग आप खुद पढ़ सकते हैं। प्रस्तुत है लोगों के बातचीत पर आधारित कुछ मुख्य अंश...
राजमहल लोकसभा क्षेत्र में भाजपा के सबसे सशक्त उम्मीदवार होंगे बाबूधन मुर्मू
सच्चे नेता में जिस सबसे बड़े गुण की अपेक्षा की जाती है, वह है आलोचकों की तरफ हाथ बढ़ाने का साहस और उन्हें सुनने का धैर्य। एक सच्चानेता आदर्शवादिता, व्यावहारिकता और दूरगामी लक्ष्यों व छोटी अवधि वाली जरूरतों के बीच सामंजस्य बनाता है। सच्चा नेता अपने द्वार पर आई असफलता और सफलता को एक भाव से लेता है। यह गुण बाबूधन मुर्मू में है। भारत युवाओं का देश है। हमारे देश की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा युवाओं का है। बाबूधन मुर्मू युवा नेता होने के नाते इनकी पकड़ युवाओं पर ज्यादा देखने को मिलती है। खेल किट्स बांटना हो या कहीं टूर्नामेंट कराना हो इनकी अहम भूमिका देखने को मिलती है। इसलिए आज देश की बागडौर यदि युवाओं के हाथ में सौंप दिया जाए तो सही मायने में विकास की गति को दिशा मिलेगी।
बाबूधन मुर्मू को सफल होने के हैं पांच गुण
1. युवा नेता : युवाओं की जनसंख्या वाले अपने देश में इनकी पकड़ युवाओं पर काफी मजबूत है। जिसमें किसी प्रकार की दो मत राय नहीं है। यह अपने स्वविवेक से संथाल में युवाओं की अच्छी टीम तैयार कर लिए हैं।
2. संथाल का तेजतर्रार नेता : बाबूधन मुर्मू को संथाल का तेजतर्रार नेता कहा जाता है। किसी काम को बखूबी अपने निर्णय से अंजाम देना इनकी पहचान बन गई है।
3. बेदाग छवि : इस युवा नेता पर आजतक किसी प्रकार के घोटाले का दाग नहीं लगा। साथ ही किसी भी आरोपों से ये अभी तक बचते आए हैं। कुलमिलाकर संथाल में आज इनकी छबि बेदाग है।
4. कर्म में विश्वास रखना : इनकी छवि आज संथाल में साफ-सुथरी है इसका कारण यह है कि बाबूधन कर्म में विश्वास रखते हैं। किसी सुनी-सुनाई बात पर कम ध्यान देते हुए खुद उसका तहकीकात करना इनकी आदत में सुमार है।
5. गरीबों के मसीहा : संथाल में इन्हें गरीबों के मसीहा के रूप में भी कहा जाता है। किसी प्रकार के दुख-तकलीफ में साथ देना, उसके दरवाजे तक पहुंचकर मदद करना इनकी फितरत है। संथाल परगना में हाथियों का आतंक या घटना-दुर्घटना से पीड़ित परिजनों को अक्सर मदद करते इनको देखा जा सकता है। यह आसानी से सबके सुलभ नेता के रूप में जाने जाते हैं। किसी शुभ काम की शुरुआत करनी हो या दुकान का उद््घाटन करना हो बाबूधन जरूर मिल जाते हैं।
कुल मिलाकर कहा जाए तो वर्तमान समय के लिए यदि इन्हें जिम्मेवारी सौंप दी जाए तो बखूबी निभाने की क्षमता रखते हैं। एक अच्छा नेता सच्चा, समसामयिक, पारदर्शी, दूरदर्शी और एक सुखद व्यक्तित्व वाला होता है। उसके पास एक मिशन, एक दर्शन, बलिदान, करुणा और प्रतिबद्धता की भावना होती है। यह सब गुण बाबूधन मुर्मू में है। अब देखना है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में बाबूधन मुर्मू की अच्छी पहचान कितना कारगर होता है। यह समय पर छोड़ दिया जाए।



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