ओबीसी रिजर्वेशन ठीक से लागू हुआ या नहीं और इसका फायदा सभी जातियों तक पहुंच रहा है या नहीं? जैसे सवालों का पता लगाने के लिए बनाए गए कमीशन ऑफ एग्जामिन सब-कैटेगोराइजेशन ऑफ ओबीसी जल्दी ही ओबीसी रिजर्वेशन के भीतर कुछ विशेष जातियों के लिए 8-10% अलग से आरक्षण की मांग कर सकता है. कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक ओबीसी की 1900 ऐसी जातियां हैं, जिन तक आरक्षण का फायदा नहीं मिला है.
क्या है मामला?
कमीशन ने पाया कि केंद्र की सूची में मौजूद 2,633 ओबीसी जातियों में से 1,900 ऐसी हैं, जिन्हें 27% रिजर्वेशन के बावजूद उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है. इन जातियों से ताल्लुक रखने वाले 3% से भी कम लोग ओबीसी रिजर्वेशन के जरिए मिली नौकरियों में मौजूद हैं. 2 अक्टूबर 2017 को केंद्र सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस जी रोहिणी की अध्यक्षता में कमीशन गठित किया था. इस कमीशन को कई बार एक्सटेंशन मिल चुका है और 31 मई को इसका कार्यकाल ख़त्म हो रहा है. एक अंग्रेजी अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि कमीशन ने रिपोर्ट पूरी कर ली है और ओबीसी रिजर्वेशन में अलग से कोटे की मांग की जाएगी.
कमीशन ऑफ एग्जामिन सब-कैटेगोराइजेशन ऑफ ओबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछड़े वर्ग को मिलने वाले आरक्षण में घोर असमानता है. ओबीसी वर्ग की सिर्फ 25 फीसदी जातियां ही 97 प्रतिशत आरक्षण का लाभ उठा ले जा रही हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि ओबीसी की 983 जातियों का जहां आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिला है, वहीं 994 जातियां आरक्षण का सिर्फ 2.68 प्रतिशत का ही लाभ ले पा रही हैं. यानी करीब 1900 जातियां ऐसी हैं जिन्हें 3% भी फायदा नहीं पहुंचा है.
किन जातियों को मिला है फायदा?
कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक, ओबीसी आरक्षण के तहत जिन जातियों को लाभ मिल है उनमें यादव, कुर्मी, जाट (राजस्थान का जाट समुदाय सिर्फ भरतपुर और धौलपुर जिले के जाट समुदाय को ही केंद्रीय ओबीसी लिस्ट में जगह दी गयी है), सैनी, थेवार, एझावा और वोक्कालिगा जैसी जातियां शामिल हैं. मौजूदा रिपोर्ट तैयार करने करने के लिए कमीशन ने ओबीसी कोटा के तहत पिछले पांच सालों के दौरान दी गयीं 1.3 लाख केंद्रीय नौकरियों का अध्ययन किया.
इसके साथ ही आयोग ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी, आइआइटी, एनआइटी, आइआइएम और एम्स जैसे संस्थानों में हुए एडमिशन का भी अध्ययन किया. रिपोर्ट में जो एक और बात निकलकर सामने आयी है, वह यह है कि जिन राज्यों में ओबीसी की जनसंख्या के हिसाब से ज्यादा कोटा दिया गया है, उन्हीं राज्यों में रिजर्वेशन का लाभ जरुरी लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है.
दिल्ली हाइकोर्ट की पूर्व चीफ रही हैं जस्टिस जी रोहिणी
कमीशन ऑफ एग्जामिन सब-कैटेगोराइजेशन ऑफ ओबीसी का गठन अक्तूबर, 2017 में किया गया था. इस कमीशन का कार्यकाल फिलहाल 31 मई, 2019 तक के लिए बढ़ा दिया गया है. दिल्ली हाइकोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस जी रोहिणी इसकी अध्यक्ष हैं. उन्होंने अपनी रिपोर्ट सभी राज्यों के चीफ सेक्रेटरी और राज्य के अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को भेज दी है.
योगी सरकार ने भी बनाया आयोग
साल 2017 में सत्ता में आते ही योगी आदित्यनाथ की सरकार ने चार सदस्यीय सामाजिक न्याय समिति का गठन किया था. जिसका काम था पिछड़ों में भी ऐसी जातियों की पहचान करना जिन्हें ओबीसी रिजर्वेशन का फायदा नहीं मिल रहा है. इसी जस्टिस राघवेंद्र कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में ओबीसी को 79 उपजातियों में बांटा है. योगी सरकार ने पिछड़ों के आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक पिछड़ेपन और नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी के अध्ययन के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राघवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमिटी बनाई थी.



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