जमशेदपुर लोकसभा सीट पर वैसे तो 23 प्रत्याशी मैदान में हैं. लेकिन सीधा मुकाबला बीजेपी के विद्युतवरण महतो और महागठबंधन के तहत जेएमएम प्रत्याशी चंपई सोरेन के बीच है. विद्युतवरण महतो यहां के सीटिंग सांसद हैं. 2014 के चुनाव में उन्होंने जेएमएम का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामा. और लोकसभा चुनाव में जेवीएम के प्रत्याशी अजय कुमार को हराया. विद्युतवरण जेएमएम के टिकट पर बहरागोड़ा से विधायक रह चुके हैं. उन्होंने अपनी सियासत की शुरुआत जेएमएम से ही की.

जेएमएम प्रत्याशी चंपई सोरेन झारखंड सरकार में दो बार मंत्री रह चुके हैं. वह लगातार सरायकेला से जेएमएम विधायक रहे हैं. हालांकि उन्होंने अपनी चुनावी सफर की शुरुआत निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर 1991 में की थी. 1991 में वह सरायकेला से जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे. चंपई जेएमएम में शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन के बाद तीसरे नंबर के नेता हैं. पार्टी में उनकी मजबूत पकड़ और टाइगर के नाम से जाने जाते हैं. जमशेदपुर और उसके आस-पास के इलाकों में वह मजदूरों के लिए आंदोलन करते रहे हैं.

जमशेदपुर औद्योगिक नगर के रूप में देश प्रसिद्ध है. पारसी व्यवसायी जमशेदजी नशरवान जी टाटा ने यहां 1907 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) की स्थापना की. उसी के साथ इस शहर की भी नींव पड़ी. यहां पर टाटा घराने की कई कंपनियां स्थापित हैं.

जमशेदपुर सीट पर बीजेपी और कांग्रेस को चार-चार बार और जेएमएम को तीन बार जीत मिली है. 1957 में यहां पहला लोकसभा चुनाव हुआ. इसमें कांग्रेस के मोहिन्दर कुमार घोष जीते. 1962 में कम्यूनिस्ट पार्टी के उदयकर मिश्रा जीतने में कामयाब हुआ. 1967 में कांग्रेस पार्टी के एससी प्रसाद और 1971 में कांग्रेस के ही सरदार स्वर्ण सिंह जीते. 1977 और 1980 में इस सीट से जनता पार्टी के रुद्र प्रताप सारंगी जीते. 1984 में कांग्रेस के गोपेश्वर जीते.
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