प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वन नेशन, वन इलेक्शन के मुद्दे पर सभी दलों को साथ लाने की कोशिश में जुटे हैं. हालांकि कई राजनीतिक दल इसे देश के विकास के लिए अच्छा बता रहे हैं, तो कई इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक मान रहे हैं. दिल्ली में इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक हुई.
राज्यों के हक छीनने की साजिश
इधर, झारखंड में इस मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है. पूर्व सीएम और जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह राज्यों के हक और अधिकार छीनने की बड़ी साजिश है. राज्य सरकारों की विफलताओं पर पर्दा डालने का प्रयास है. इससे चुनाव के दौरान राज्यों के मुद्दे दब जाएंगे, जबकि राष्ट्रीय मुद्दे हाबी होंगे.
अच्छा, पर तकनीकी पहलूओं को समझें
हालांकि जेएमएम से अलग कांग्रेस इसका पक्षधर है. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता आलोक दुबे ने कहा कि यह अच्छा प्रयास है, लेकिन इस पर सभी राजनीतिक दलों के साथ- साथ चुनाव आयोग एवं विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों से भी राय लेनी चाहिए. वन नेशन, वन इलेक्शन से समय और खर्च दोनों बचेंगे, लेकिन लागू करने से पहले इसके विभिन्न तकनीकी पहलूओं पर ध्यान देना जरूरी है.
नहीं रूकेंगे विकास के काम
बीजेपी विधायकों का कहना है कि पीएम मोदी की ये पहल सराहनीय है. इससे चुनावों में होने वाले खर्च पर अंकुश लगेगा. साथ ही विकास के काम भी बाधित नहीं होंगे. अलग- अलग समय में चुनाव होने के चलते देश के उस हिस्से में विकास के काम उस पीरियड के लिए रूक जाते हैं.



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