झारखंड में आने वाले विधानसभा चुनावों की आहट सुनाई देने लगी है. लोकसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करने के बाद बीजेपी ने झारखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मिशन 60 पर फोकस करना शुरू कर दिया है. मोदी लहर में बीजेपी ने झारखंड की 14 लोकसभा सीटों में से 12 सीटें जीत हासिल करी लीं, लेकिन विधानसभा चुनाव में मुकाबला इतना आसान नहीं रहने वाला है. राज्य के चुनाव में स्थानीय मुद्दे अपना असर दिखा सकते हैं. इससे निपटने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है. सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं को गति देकर लोगों का विश्वास जीतना चाहती है. इसके लिए केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है.

सरकार को उज्ज्वला योजना की कामयाबी पर भरोसा

लोकसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी की शानदार कामयाबी के पीछे केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का बहुत बड़ा हाथ रहा है. एक सर्वेक्षण में इस बात की तस्दीक भी की गई कि कैसे चुनावों से काफी पहले ही केंद्र सरकार ने देश के करीब 115 पिछड़े जिलों की पहचान करके वहां अपनी कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं, जिसका चुनाव में उन्हें फायदा मिला. उज्ज्वला योजना इन्हीं कल्याणकारी योजानओं में से एक है. अब झारखंड सरकार ने इस योजना की कमियों को दुरुस्त करके लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश में है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ऐलान किया है कि राज्य सरकार उज्ज्वला योजना के लाभान्वितों को एक बार फिर गैस सिलेंडर भरवाकर देगी.

झारखंड में उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को करीब 30 लाख गैस कनेक्शन बांटे गए हैं. गैस कनेक्शन देते वक्त इन्हें भरे हुए सिलेंडर मुफ्त में दिए गए थे. इन सरकार दोबारा इनकी मुफ्त में रिफिलिंग भी करवाएगी. इसके साथ ही सरकार ने इस योजना से 14 करोड़ और परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है. उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त में गैस कनेक्शन हासिल करने के शर्तों में भी ढील दी गई है. पहले सामाजिक और आर्थिक सर्वे के डेटा के आधार पर कनेक्शन दिए जा रहे थे. अब जाति प्रमाण पत्र और राशन कार्ड के आधार पर गरीब परिवारों की पहचान कर गैस कनेक्शन दिए जाएंगे.

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