झारखंड ऊर्जा विकास निगम (तत्कालीन झारखंड राज्य बिजली बोर्ड) ने साल 2007 में 120 पदों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की थी. इसमें मात्र 78 अभ्यर्थी ही पास हुए थे. लेकिन 261 लोगों को बहाल कर लिया गया. यानि कुल पास अभ्यर्थी से 183 अधिक को नौकरी दे गई. इन्हें विपत्र लिपिक, पत्राचार लिपिक और भंडार सहायक के पद पर बहाल कर लिया गया. लेकिन ऑडिट के दौरान महालेखाकार ने इन नियुक्तियों पर आपत्ति जताई. इसके बाद आईपीएस ए नटराजन की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी. नियुक्ति के 12 साल बाद कमेटी की रिपोर्ट पर अब 169 कर्मियों को शो- कॉज जारी किया गया है. इन्हें 15 दिनों के अंदर अपना पक्ष रखने को कहा गया है.
महालेखाकार की रिपोर्ट में खुलासा
महालेखाकार ने 2016-17 में इन नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए सरकार को रिपोर्ट भेजी थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि 2007 में 50 विपत्र लिपिकों के लिए आयोजित परीक्षा में 32 उम्मीदवार ही सफल हुए. लेकिन 79 लोगों को नियुक्त कर लिया गया. यानी 47 अधिक नियुक्तियां कर ली गईं. वहीं एससी, एसटी के 18 पद रिक्त रह गये. पत्रचार लिपिक के 65 पदों के लिए हुई परीक्षा में 42 उम्मीदवार ही सफल हुए, जबकि 169 लोगों को नौकरी दे दी गई. यहां भी 127 ज्यादा बहाली कर ली गई. भंडार सहायक के पांच पद के लिए ली गई परीक्षा में 4 उम्मीदवार सफल हुए, लेकिन 13 लोगों को बहाल कर लिया गया.
जांच रिपोर्ट के आधार पर शो- कॉज
महालेखाकार की रिपोर्ट के बाद ऊर्जा विकास निगम ने आईपीएस अधिकारी ए नटराजन की अध्यक्षता में सितम्बर 2018 में जांच कमेटी गठित की. कमेटी ने फरवरी 2019 में अपनी रिपोर्ट निगम को सौंप दी. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि नियुक्तियों में बोर्ड के संकल्प संख्या- 387 में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया. जांच रिपोर्ट के आधार पर निगम ने 169 लोगों को शो- कॉज जारी किया है.



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