आज पूरा देश कारगिल विजय दिवस मना रहा है. 20 साल पहले 26 जुलाई 1999 को हमारी सेना ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को परास्त किया था. हालांकि इस विजयगाथा को लिखने में सैंकड़ों जवानों को अपनी जान की कुर्बानी देनी पड़ी. झारखंड के गुमला जिले के तीन लाल ने अपने लहू से वीरता की अमिट कहानी लिखी. शहीद जॉन अगस्तुस एक्का, शहीद बिरसा उरांव और शहीद विश्राम मुंडा के नाम आज भी जिले में सम्मान के साथ लिये जाते हैं. लोगों का कहना है कि गुमला के इन तीनों बेटों को देश कभी भूला नहीं सकता. इनके शौर्य को नमन है.

शहीद के परिवार को सुविधाओं का इंतजार

रायडीह प्रखंड के परसा तेलेया गांव के रहने वाले जॉन अगस्तुस एक्का का तिरंगा में लिपटा शव जब गांव पहुंचा था, तो पूरा इलाके में गर्व और गम का माहौल था. उस पल को याद कर शहीद की पत्नी कहती हैं कि तब मेरे दोनों बेटे छोटे थे, जिसकी चिंता मुझे सता रही थी. अगस्तुस देश के लिए शहीद हुए, पर परिवार को जो सुविधा मिलनी चाहिए थी, वह आज भी नहीं मिली है. परिवार आज भी सेना व सरकार से मिलने वाली सुविधा से महरूम है.

शहीद की पत्नी ने बताया कि अगस्तुस लांस नायक से हवलदार रैंक तक गये थे. इस दौरान उन्हें चार मेडल मिले थे. उनका सपना दोनों बेटों को फौज में बड़ा अधिकारी बनाने का था, जो अब अधूरा रह गया.

दरअसल शहीद एक्का की पत्नी के आधारकार्ड में टाइटल लकड़ा लिखा हुआ है. इस वजह से उन्हें मार्च 2018 से पेंशन नहीं मिल रही है. सरकार ने जमीन- घर देने का वादा किया, वो भी नहीं मिला है.
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