एक घरेलू महिला के लिए अच्छा जीवन जीने के लिए साधारण सी नौकरी पति अच्छे पद पर हो तो पर्याप्त है. लेकिन जब आप जज्बे और जुनून कुछ कर दिखाने की बात हो तो सारी सुख सुविधा व्यर्थ दिखती है. साधारण सी महिला के लिए महिलाओं के लिए अधिकार और सामाजिक सेवा की बीड़ा उठाना कोई आसान राह नहीं है के लगभग दो दशक से लगातार महिलाओं के लिए हिंसा सुरक्षा पर पड़ने वाले असर के विनाशकारी प्रभावों को समझने में हाल के दशक में बड़ा बदलाव आया है. हम बात कर रहे हैं सुंदरी तिर्की एक साधारण घर समाज उत्कंठाओं से उभर कर उच्च शिक्षा और वकालत कर समाज की सेवा कर रही. सुंदरी तिर्की परिचय के मोहताज नहीं सुंदरी तिर्की पढ़ाई कर आंगनवाड़ी सेविका के पद पर नियुक्त 1993 से लेकर 2010 तक समाज से जुड़ कर सेवा की सेवा के कार्यकाल में महिलाओं की पीड़ा सहन नहीं कर पाई आंगनबाड़ी सेविकाओं को अधिकारों के लिए ट्रेड यूनियन की गठन कर लगातार 10 साल से लड़ाई लड़ रही है. इसके अलावा मजदूरों को हक और अधिकार दिलाने के लिए क्रेशर मजदूर यूनियन की कमान संभालते लंबी लड़ाई लड़ रही है सुंदरी तिर्की का कहना है हमारी लड़ाई तब तक रहेगी जब तक मजदूर और महिलाओं को अधिकार और सम्मान नहीं मिल जाएगा तब तक लड़ाई जारी रहेगी इस लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने के लिए श्रीमती तिर्की 1996 में आरजेडी से जुड़कर खिजरी विधानसभा से पहली बार चुनाव लडी . 2010 में जिला परिषद सदस्य का चुनाव जीतकर जिला परिषद अध्यक् के रूप में चुनी गई 2013 में कांग्रेस में ज्वाइन कर 2014 में कांग्रेस के टिकट से दूसरी बार चुनाव लड़ी दूसरे स्थान पर रही विधानसभा क्षेत्र में लगातार महिलाओं एवं मजदूरों का हक को लेकर संघर्ष की सफलता की कहानी रच रही उनका मानना है कि 2019 में विधानसभा चुनाव में अगर जीती हूं, जनता का अपार समर्थन प्राप्त होता है तो विधानसभा पहुंचकर महिलाओं के लिए हक की लड़ाई सबसे पहली प्राथमिकता होगी सुंदरी तिर्की के परिवार की पीढ़ी में पहली बार उनके पीढ़ी के महिला राजनीतिक में कदम रखें और जनता की सेवा कर रही है सूत्रों का मानना है कि इस बार कांग्रेस पार्टी खिचड़ी विधानसभा से अपना प्रत्याशी चुनकर चुनाव लड़ेंगे
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