राष्ट्रहित के लिये केवल चौथा स्तंभ गंभीर: संजय सिंह ★पेंशन योजना में संशोधन की मांग मुख्यमंत्री के समक्ष उठायेंगे: विधायक
★पत्रकार एक पक्षीय रिपोर्टिंग से बचें: अशोक पांडेय ★प्रबंधन है पत्रकारों के लिये सबसे बड़ी चुनौती:ओमप्रकाश अश्क
धनबाद से शौकत खान की रिपोर्ट
धनबाद । धनबाद के सिंफर सभागार में झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन धनबाद जिला इकाई द्वारा आयोजित एक दिवसीय परिचर्चा "राष्ट्रहित में चौथे स्तंभ की भूमिका" पर अपने संबोधन में धनबाद विधायक राज सिन्हा ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ होते हैं और वे सही मायनों में राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हुये देश एंव समाज की बेहतरी के लिये कार्य करते हैं। श्री सिन्हा ने कहा कि झारखंड की रघुवर दास सरकार ने पिछले 19 वर्षों में जो कार्य नहीं हुये वह कर दिखाया है पत्रकारों के लिये प्रेस क्लब, पेंशन योजना एंव स्वास्थ योजना को लागू किया है साथ ही जल्द ही पत्रकार सुरक्षा क़ानून को लागू किया जायेगा।संगठन द्वारा इन योजनाओं के नियमावली में बदलाव की मांग का समर्थन करते हुये उन्होंने मुख्यमंत्री रघुवर दास के समक्ष आंचलिक पत्रकारों को इन योजनाओं का लाभ दिलवाने का वादा किया। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव संजय सिंह ने कहा कि लोकतंत्र के चारों स्तंभ में केवल चौथा स्तंभ ही सबसे निष्पक्ष व इमानदारी के साथ कार्य कर रहा है।संजय सिंह ने कहा कि भ्र्ष्टाचार के मामलों में नेता,मंत्री व पदाधिकारियों के घर छापों में करोड़ों रुपये मिलते हैं ऐसी खबरें हमें अक्सर पढ़ने को मिलती हैं कभी आप ने यह नहीं सुना होगा किसी पत्रकार के घर छापे में करोड़ों रुपये मिले हों।उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में पत्रकारिता करने वालों पर चौतरफा दबाव रहता है वे विषम परिस्थितियों में भी उस दबाव के आगे नहीं झुकते। कशिश न्यूज़ के संपादक ओमप्रकाश अश्क ने कहा कि आज पत्रकारों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती प्रबंधन है।प्रबंधन का दबाव पत्रकारों पर हमेशा बना रहता है,आंचलिक पत्रकारों के लिये समस्यायें और भी जटिल हैं।पत्रकार हत्या के उपरांत जिस प्रबंधन के लिये पत्रकार अपनी जान की बाज़ी लगा देता है वही प्रबंधन उसे पत्रकार मानने से ही इंकार कर देता है।दैनिक हिन्दुस्तान के पूर्व झारखण्ड हेड वरिष्ठ पत्रकार अशोक पांडेय ने कहा कि राष्ट्रहित में अगर कोई कार्य कर रहा है तो वह केवल और केवल पत्रकार हैं आज देश भर में हर राजनीतिक दल एंव सभी नेताओं का अपना अपना एजेंडा है और वह सभी अपने अपने एजेंडों के लिये कार्य कर रहे होते हैं।पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं हत्यायें हो रही हैं उसके बावजूद पत्रकार अपने दायित्व का निर्वाह आज भी निर्भीक हो कर कर रहे हैं।उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुये कहा कि पत्रकार एक पक्षीय पत्रकारिता करने से बचें,जबतक संबंधित पक्ष का वक्तव्य नहीं लेते तबतक खबरें नहीं बनायें। उत्तराखंड पत्रकार संघ के महासचिव गिरधर शर्मा ने कहा कि झारखंड और उत्तराखंड का जन्म एक साथ हुआ है इसलिए यह दोनों राज्य आपस में भाई की तरह हैं दोनों ही राज्यों में पत्रकारों की समस्याएं एक समान हैं।उन्होंने कहा कि झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन की कार्यशैली को देख कर यह मैं कह सकता हूँ कि देश भर में अनेकों पत्रकार संगठन हैं जो पत्रकार हितों की रक्षा की दावेदारी करते हैं परंतु झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन की कार्यशैली उसे देश के सर्वोच्च संगठन बनाता है अन्य संगठनों को झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन से सीख लेने की आवयश्कता है।संगठन के संस्थापक शाहनवाज हसन ने कहा कि पत्रकार राष्ट्रहित के साथ कभी कोई समझौता नहीं करते हम किसी दल के समर्थक अथवा विरोधी नहीं होते हमारी प्राथमिकता मज़बूत राष्ट्र का निर्माण और सिस्टम की कमियों को उजागर कर उसका समाधान करना होता है,इस कार्य में अनेकों पत्रकारों की हत्यायें यह प्रमाणित करती हैं कि आज भी देश का 99 प्रतिशत पत्रकार पूरी निष्पक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रहे हैं।झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा पत्रकारों के लिये पेंशन एंव बीमा योजना को शाहनवाज हसन ने हाथी के दांत से संज्ञान देते हुये कहा कि जबतक पत्रकारिता के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति आंचलिक पत्रकारों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिलता तब तक यह योजना छलावे मात्र से अधिक कुछ भी नहीं है।श्री हसन ने कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास पत्रकारों के लिये सदैव गंभीर रहे हैं इसलिये उन्हें आशा ही वे इन योजनाओं की कमियों में संशोधन कर इसे प्रभावी बनाने का कार्य करेंगे। संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने कहा कि झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने पिछले 5 वर्षों में जो लगभग 139 पत्रकारों के मामलों में संज्ञान लेते हुये उनके समाधान का प्रयास किया है। हम कैंडल मार्च और धरना देने वालों में से नहीं हैं हम पत्रकार साथियों को इंसाफ दिलाने तक उनके साथ खड़े रहते हैं आज चतरा के दिवंगत पत्रकार इंद्रदेव यादव एंव चंदन तिवारी के हत्या के मुकदमो की लड़ाई भी हम लड़ रहे हैं वहीं सरकार के समक्ष सबसे पहले पत्रकार सुरक्षा कानून, पत्रकार पेंशन योजना एंव पत्रकार बीमा योजना की मांग को न केवल मज़बूती से उठाया है बल्कि मुख्यमंत्री ने सबसे पहले झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन को ही यह आश्वासन दिया था कि यह सभी योजनाएं लागू की जायेंगी जब्कि आज इन योजनाओं के लागू होने पर डंका वे पीट रहे हैं जिनकी कोई भूमिका ही नहीं रही है। श्री सिंह ने कहा कि दिल्ली,राजस्थान, छतीसगढ़, बिहार, बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक के बाद अब उत्तराखण्ड एंव उत्तरप्रदेश के पत्रकार साथी राष्ट्रीय स्तर पर हमारे साथ संगठित हो चुके हैं हमारे संगठन का लक्ष्य ही हमें संगठनों की भीड़ से अलग करता है।यह देश का एक मात्र पत्रकार संगठन है जो अपने सदस्यो को आर्थिक रूप से मज़बूती प्रदान करने के लिये भी कार्य कर रहा है।सम्मेलन में सर्वसम्मति से पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने के लिये दिल्ली में एक दिवसीय धरना का निर्णय लिया गया साथ ही मध्यम एंव छोटे समाचार पत्रों के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विशेष रूप से उन्हें बचाये रखने के लिये समाचार पत्रों पर से GST को समाप्त करने की मांग की गयी।राष्ट्रीय सम्मेलन में दैनिक बिहार ऑब्ज़र्वर के संपादक गणेश मिश्रा, सोनभद्र उत्तरप्रदेश से विवेक पांडेय, दिल्ली से पत्रकार पवन भार्गव,महेंद्र शर्मा, बिहार से राजेश प्रसाद, उत्तराखंड से नारायण जी, दिल्ली से रूपम सिन्हा एंव झारखण्ड के समस्त जिलों के पत्रकार शामिल हुये। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह व संचालन निशा रानी गुप्ता और धन्यवाद ज्ञापन पवन भार्गव ने किया ।




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