रांची. झारखंड हाईकोर्ट ने हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पर एक महीने के लिए रोक लगा दी है. कोर्ट ने पहली नजर में राज्य सरकार के उस फैसले को गलत माना है, जिसके तहत 13 जिलों को सिर्फ स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित किया गया है. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे लार्जर बेंच में रेफर कर दिया है. इस मामले में लार्जर बेंच में अगली सुनवाई 4 नवम्बर को होगी. बुधवार को इस मामले की सुनवाई कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश हरीश चन्द्र मिश्रा और न्यायाधीश दीपक रौशन की अदालत में हुई.
13 जिलों को आरक्षित करने को चुनौती
सोनी कुमारी बनाम स्टेट ऑफ झारखंड के इस मामले में प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार ने हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति में राज्य के 13 जिले को स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित कर दिया है, जो संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध है. जबकि 11 जिलों को गैर आरक्षित रखा गया है. इन जिलों के लिए कोई भी आवेदन कर सकता है.
प्रार्थी के अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने दलील दी कि राज्य सरकार के इस फैसले से इन जिलों में सौ प्रतिशत आरक्षण लागू हो जाता है, जिसकी इजाजत संविधान नहीं देता है. वहीं झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से बताया गया कि सरकार के निर्देश के अनुरूप अधिसूचना जारी की गयी है. सरकार ने जिलेवार नियुक्ति का विज्ञापन निकालने का आदेश दिया था.
18 हजार शिक्षकों के लिए निकाला विज्ञापन
वर्ष 2016 में 18584 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया. इसमें 13 जिलों को स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित कर दिया गया और 11 जिले को गैर आरक्षित रखा गया. सरकार के इस कदम के खिलाफ सोनी कुमारी एवं अन्य ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. और 13 जिलों को आरक्षित करने के फैसले को चुनौती दी है.



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