झारखंड में बजट सत्र को बीच में ही स्थगित करने के सरकार के फैसले को झारखंड विकास मोर्चा ने लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है. बुधवार को पार्टी कार्यालय में झारखंड विकास मोर्चा के नेता बाबूलाल मरांडी ने संवाददाता सम्मेलन कर कहा कि भ्रष्टाचार तथा अन्य गंभीर आरोपों में फंसे सूबे के बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए सरकार नेबजट सत्र को चलने नहीं दिया. उन्होंने कहा कि इन भ्रष्ट अधिकारियों को हटाना तो दूर सरकार इन पर विधानसभा में चर्चा करने तक को तैयार नहीं हुई. इससे सरकार की तानाशाही रवैया साफ झलकती है. उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री और यहां झारखंड के मुख्यमंत्री भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध भाषण देते हैं, मगर यहां के भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रहे हैं.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार खुद भ्रष्टाचार में लिप्त है. इनकी भ्रष्टाचार की कहानी सार्वजनिक की जाती रही है और इस बारे में राज्यपाल को भी लिखित दिया गया है. अगर सदन नहीं चला तब इसके पीछे का कारण भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने ही है. इसीलिए समय से पहले ही विधानसभा को स्थगित कर दिया गया.
स्थानीय नीति के विरोध में भाजपा के अंदर से ही उठी आवाज को झारखंड के आम आवाम की आवाज करार देते हुए झाविमो नेता ने कहा कि झारखंड विकास मोर्चा ने शुरू से ही स्थानीय नीति को झारखंड विरोधी बताया है. वर्ष 2017 से अभी तक झारखंड में अनारक्षित कोटे में हुई नियुक्तियों का श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार संवैधानिक प्रक्रिया के तहत झारखंड में सभी नौकरियों को अगले 20 वर्ष तक सिर्फ झारखंडियों के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कराकर केंद्र को भेजे.



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