पक्ष - विपक्ष में जारी गतिरोध के बीच झारखंड विधानसभा का बजट सत्र संपन्न हो गया. विपक्ष की गैर - मौजूदगी और वॉकआउट के बीच सदन में बजट पास करा दिया गया. लेकिन बड़ा सवाल ये कि जनता के उन सवालों का क्या, जो सदन के माध्यम से सरकार से पूछा जाना था.

17 जनवरी से शुरू हुआ बजट सत्र सात फरवरी तक चलना था. लेकिन पक्ष-विपक्ष के बीच जारी गतिरोध की वजह से सत्र को सात दिन पहले ही संपन्न कर दिया गया. बजट सत्र के दौरान सदन में काला नकाब दिखायी पड़ा, पोस्टर-बैनर दिखायी पड़े, साइकिल और हंगामा भी दिखाई पड़ा. सदन में जूते तक की चर्चा हुई. अगर कुछ नहीं दिखा, तो वो था वे सवाल, जो राज्य की सवा तीन करोड़ जनता से सीधे जुड़े थे. नेता प्रतिपक्ष अब सदन में उठाये गये सवालों को लेकर जनता के बीच जाने की बात कही है.

मंगलवार को सदन की कार्यवाही बमुश्किल एक घंटे भी आर्डर में नहीं रही. इन सबके बीच सदन में 23 जनवरी को पेश हुए 82 हजार करोड़ के बजट को बगैर चर्चा और विपक्ष के वॉकआटट के बीच पास करा दिया गया. सदन में हंगामे की वजह से संसदीय कार्य मंत्री इतने ज्यादा व्यथित नजर आये कि उन्होंने सदन की कार्यवाही में हिस्सा तक नहीं लिया और उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री के पद से हटा दिये जाने का अनुरोध मुख्यमंत्री से कर दिया.

सवाल ये नहीं कि बजट सत्र का वक्त से पहले अवसान हो गया या फिर सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच गतिरोध जारी रहा. सवाल ये है कि सदन में जारी संकट का कोई सर्वमान्य समाधान राज्य की सबसे बड़ी पंचायत नहीं खोज पायी.


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