कोडरमा में कांग्रेस जिलाध्यक्ष शंकर यादव की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी मुनेश यादव सहित पांच लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इनकी गिरफ्तारी कर्णाटक और पश्चिम बंगाल से हुई है. मुनेश यादव के भाई पवन यादव, नरेश यादव, सुदीप यादव तथा रामदेव यादव की भी इस मामले संलिप्तता सामने आई है. डीआईजी भीमसेन टूटी ने प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी. इस दौरान एसपी शिवानी तिवारी सहित कई पुलिस पदाधिकारी मौजूद थे.
डीआईजी ने कहा कि शंकर यादव को विस्फोट से उड़ाने की साजिश हमले से दो महीने पहले रची गई थी. खदान को लेकर शंकर यादव और मुनेश यादव में विवाद चल रहा था. इस विवाद के चलते ही हत्या को अंजाम दिया गया. भीमसेन टूटी ने इस घटना में नक्सलियों के हाथ होने से इंकार किया साथ ही कहा कि आपसी रंजिश में इस तरह से विस्फोटक का इस्तेमाल सूबे में पहली बार किया गया.
पुलिस के मुताबिक मुनेश यादव और पवन यादव ने घटना को लेकर योजना बनाई. ऑटो खरीदकर उसमें विस्फोटकों की फिटिंग करवाई. नरेश यादव, सुदीप यादव तथा रामदेव यादव ने रेकी और घटनास्थल के चयन में मदद की. पुलिस के मुताबिक सुदीप यादव ने शंकर यादव के माइन्स से निकलने की सूचना पवन यादव को दी, जो पहले से घटनास्थल पर विस्फोटक लगे ऑटो लेकर खड़ा था. शंकर यादव के स्कॉर्पियो के नजदीक आते ही पवन यादव ने ऑटो में विस्फोट करा दिया और नरेश यादव के साथ बाइक पर मौके से फरार हो गया. सुदीप यादव भीड़ का हिस्सा बन गया.
बीते मंगलवार शाम को कोडरमा के चंदवारा थानाक्षेत्र के ढाब थाम में शंकर यादव की स्कॉर्पियो को ऑटो में बम प्लांट कर उड़ा दिया गया था. इस हमले में शंकर यादव और उनके अंगरक्षक कृष्णा यादव की मौत हो गयी थी, जबकि चालक धर्मेन्द्र यादव का रिम्स में इलाज चल रहा है. सीएम के निर्देश पर घटना की जांच एसआईटी को सौंपी गई. एसआईटी ने धनबाद, रांची और हजारीबाग में छापेमारी कर हत्या से जुड़े अहम सुराग बरामद किए हैं.



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