लोहरदगा में पन्द्रह लाख का इनामी नक्सली रिजनल कमांडर मंजीत साहू उर्फ मंजीत जी ने डीआईजी एवी होमकर के समझ सरेंडर कर दिया. पहले माओवादी फिर अपना जेजेएमपी संगठन बनाने वाले मंजीत जी पर ग्यारह अापराधिक मामले गुमला और लोहरदगा जिले के विभिन्न थानों में दर्ज हैं.
एसपी कार्यालय में आयोजित नई दिशा कार्यक्रम में तहत रिजनल कमांडर ने सरेंडर किया. इस मौके पर उसने कहा कि माओवादी लोगों को ठग-फुसला कर संगठन में शामिल करते हैं. माओवादी विचारधारा जब उसे समझ नहीं आने लगी तब उसने खुद का संगठन खड़ा कर लिया.
घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से मंजीत साहू ने वर्ष 2004-05 में माओवादी संगठन से जुड़ा. माओवादी संगठन से मंजीत को संजय यादव के द्वारा जोड़ा गया. वर्ष 2007-08 में मंजीत ने खुद का झारखंड जन मुक्ति परिषद संगठन गठित किया. वो गुमला, लोहरदगा और लातेहार में घटनाओं को अंजाम देता रहा.
मंजीत साहू की माने तो परिजनों के दवाब और नई दिशा से प्रभावित होकर उसने पुलिस के समझ सरेंडर करने का फैसला किया. लोहरदगा में वर्ष 2013 से अब तक 21 नक्सलियों ने सरेंडर किया है.
डीआईजी एवी होमकर ने कहा कि बचे हुए नक्सली जल्द ही क्षेत्र से खत्म हो जायेंगे. चाहे वे सरेंडर करेंगे या अभियान के द्वारा खत्म कर दिये जाएंगे. मौके पर डीसी विनोद कुमार, एसपी राजकुमार लकड़ा, सीआरपीएफ कमांडेंट मनोज गुप्ता, एएसपी सहित कई पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे.



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