राज्य में भलें ही पंचायतों को सशक्त करने को लेकर लंबी चौड़ी बातें की जाती रही हो, मगर हकीकत यह है कि आज भी पंचायतों को पूर्ण अधिकार नहीं मिले हैं. ऐसे में 2015 में निर्वाचित मुखिया सरकार के वादा खिलाफी से परेशान होकर आंदोलन की राह पर चल पड़े हैं.
लंबे समय से पंचायतों को अधिकार देने की मांग कर रहे मुखियाओं का अब सब्र का बांध टूट रहा है. सरकार के वादाखिलाफी से नाराज राज्यभर के हजारों मुखिया ने एकस्वर से सरकार के खिलाफ बिगुल फूंकने का निर्णय लिया है. विधानसभा सभागार में राज्यभर से आए मुखियाओं ने ना केवल सरकार पर निशाना साधा बल्की पंचायती राज एक्ट के तहत संवैधानिक अधिकार नहीं मिलने पर अब आंदोलन छेड़ने का निर्णय लिया.
राज्यभर में 4402 पंचायतें हैं जहां 2015 के चुनाव में ये मुखिया निर्वाचित हुए थे. इनके उपर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने की जिम्मेवारी है. सरकार इन्हें हर महीने मानदेय के रुप में एक हजार रुपये भी देती है, सरकार को 29 विभागों के अधिकार को पंचायती संस्थाओं को हस्तांतरित करने हैं. अभी तक 14 विभागों के अधिकार ही इन्हें मिले हैं. सरकार कहीं न कहीं पंचायतों को अधिकार देने में अभी तक उदासीन ही रही है.
पंचायतों के माध्यम से ग्रामसभा को मजबूत करने की कवायद पिछले दिनों रघुवर सरकार ने की थी. मगर जब अधिकार देने की बात आई तो सरकार की चुप्पी इन मुखियाओं को रास नहीं आ रहा है, ऐसे में आंदोलन की राह पर चल पड़े इन मुखियाओं की नाराजगी कहीं न कहीं सरकार की छवि को धुमिल करने का ही काम करेगा.



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