कांग्रेस में ऑल इज नॉट वेल की स्थिति है. मिशन 2019 के लिए संगठन में इन दिनों जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक में फेरबदल किए जा रहे हैं. फेरबदल शुरू होते ही नेताओं की नाराजगी सतह पर आनी शुरू हो गई है. कुछ महीने पूर्व सोशल मीडिया के इंचार्ज बने राकेश सिन्हा को जब अचानक ये पता चला कि उनकी जिम्मेवारी किसी और को दे दी गई है तो वो भौंचक रह गए. अभी राकेश सिन्हा ने कामकाज ठीक से संभाला भी नहीं था कि अचानक उनकी कुर्सी चली गई. कुछ इसी तरह का बदलाव इन दिनों प्रदेश कांग्रेस के अंदर हो रहा है.
प्रदेश कांग्रेस में जिलाअध्यक्षों को बदले जाने के बाद नए सिरे से विधानसभा प्रभारी बनाए गए हैं. जाहिर तौर पर बदलाव के इस दौर में कांग्रेस के अंदर ऑल इज नॉट वेल जैसी स्थिति है. पार्टी के अंदर बड़े नेताओं और उनके समर्थित सेंकेंड लाइन के नेता कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार द्वारा किए जा रहे इस बदलाव से खासे नाराज हैं.
कहने को तो इस बदलाव के पीछे मिशन 2019 में पार्टी को कामयाबी दिलाने को लेकर है मगर दूसरी वजह कुछ और ही है. प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद डॉ. अजय कुमार पार्टी की नई टीम बनाने की जुगत में हैं
जिससे बड़े नेताओं की गुटबाजी खत्म करने के साथ नई उर्जा के साथ पार्टी अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन कर सके.
पिछले 15 दिनों के अंदर जिलाध्यक्षों के फेरबदल, मीडिया विभाग में बदलाव और उसके बाद विधानसभा प्रभारी में बदलाव किए जा चुके हैं. अब जल्द ही प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यसमिति को पुनर्गठित करने की कवायद की जा रही है. ऐसे में देखने वाली बात होगी कि उठ रहे विरोध के स्वर को पाटने में डॉ. अजय कुमार किस हद तक सफल होते हैं.



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