आदिवासियों को मिलनी चाहिए बुनियादी सुविधाएं।
पाकुड़, हिरणपुर, मंझलाडीह पंचायत-
हिरनपुर प्रखंड के मंझलाडीह पंचायत में आदिवासियों के 7 गांवों में पेयजल की घोर समस्या है ।पेयजल के लिए मुखिया के द्वारा प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। पंचायत की मुखिया शांति मुर्मू बताती है कि उनके पंचायत में कुल 11 गांव है जिसमें 7 गांव पूर्णतः आदिवासी गांव है। डी एम एफ टी के माध्यम से सरकार द्वारा ग्रामीणों को उचित सुविधाएं मिलनी चाहिए। उनके पंचायत के महारो,शितपहाड़ी, फतेहपुर, शहरपूर व कस्तूरी पूर्ण खनन क्षेत्र है जहां पर्यावरण प्रदूषण का संकट है ।क्षेत्र के लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं लेकिन सरकार के द्वारा स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का उचित पहल नहीं किया जा रहा है। मध्य विद्यालय और प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक की घोर कमी है जिस कारण नियमित रूप से शिक्षण का संचालन नहीं हो रहा है। खनन क्षेत्र के गांवों में श्रम अधिनियम का उल्लंघन हो रहा है और अवयस्क बच्चे भी खदानों में ढुलाई के कार्य में संलग्न है जिस कारण बच्चे शिक्षा से दूर हो रहे हैं। महारो, ऊपरबंधा, फतेहपुर के गांव के लोगों तक सड़क नहीं पहुंची है।बिजली आपूर्ति नियमित नहीं किया गया है ,ट्रांसफार्मर की भी समस्या बनी हुई है। पंचायत की मुखिया बताती है कि उनके द्वारा अब तक 6पीसीसी,190 पीएम आवास, 15 डोभा, 20कुँआ,5चापाकल मरम्मत , 800 शौचालय,6चबूतरा का निर्माण कराया गया है।



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