मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सोमवार को ग्रामीण विद्युतीकरण की समीक्षा की और अफसरों को कई प्रकार की हिदायत दी. सीएम ने अफसरों को हर हाल में दिसम्बर तक ग्रामीण विद्युतीरण का काम पूरा करने का निर्देश दिया.

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विद्युतीकरण के अलावा रांची में चल रहे अंडरग्राउंड केबलिंग के बारे में भी जानकारी ली, जिसका काम पिछले तीन साल से कछुए की गति से चल रहा है. बैठक में उर्जा सचिव नितीन मदन कुलकर्णी, बिजली वितरण निगम के एमडी राहुल पुरवार, ग्रामीण विद्युतीकरण के जीएम ओपी अमबष्ठा भी
मौजूद थे. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि हर हाल में शेष बचे 12 हजार गांवों का विद्युतीकरण इस साल के अंत तक पूरा हो जाना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान भारत सरकार की रैंकिंग में झारखंड की बिजली व्यवस्था के गिरते पायदान पर भी चिंता जतायी. सीएम ने यह माना कि कहीं ना कहीं काम लेने वाले संवेदक की लापरवाही की वजह से बिजली के प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पा रहे हैं. सीएम ने तीन एजेंसियों को सख्त लहजे में ब्लैक लिस्टेड तक करने की चेतावनी दी.

वक्त पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं होने के संभावित कारण 

- समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में बिजली वितरण निगम को 680 करोड़ का घाटा
- उपभोक्ताओं को बिजली वितरण बिल पहुंचाने में नाकाम रहा
- बिजली बिल के लिए कई उपभोक्ताओं ने सीएमओ से पैरवी करवायी
- सबसे ज्यादा रेट पर बिजली वितरण निगम बिजली खरीदती है
- निजी एजेंसियां बगैर संसाधन के टेंडर ले लेती हैं
- उर्जा विभाग में अफसरों के बीच समन्वय का अभाव
- कई एजेंसियों पर विभागीय अफसरों की मेहरबानी

कुल मिलाकर कहें तो बिजली वितरण निगम के अधिकारियों की नाकामी के चलते राज्य बदनाम हो रही है.
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