रांची के मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम से बच्चा बेचे जाने के मामले को सीएम रघुवर दास ने गंभीरता से लिया है. इस सिलसिले में सीएम ने मंगलवार को समाज कल्याण विभाग और बाल संरक्षण आयोग के साथ बैठक की. बैठक में मुख्यमंत्री ने बाल संरक्षण आयोग को कई निर्देश दिये.
समाज कल्याण विभाग की सचिव हिमानी पांडेय ने कहा कि सीएम ने बाल संरक्षण आयोग को सूबे के बाल गृह और आश्रय होम्स का जायजा लेने का निर्देश दिया है. इस दौरान उन जगहों पर कमियों को चिह्नित कर उसे दूर कराया जाएगा. आयोग ये काम बाल कल्याण समिति के साथ मिलकर करेगा और इस पर एक रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा.
समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष उषा पांडेय ने कहा कि सीएम से मांग की गई है कि सूबे में एनजीओ के जरिये मिशनरीज के द्वारा किये जा रहे कामों की भी जांच कराई जाए. बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बबन गुप्ता ने कहा कि सीडब्ल्यूसी और बाल संरक्षण आयोग की सक्रियता के चलते बच्चा बेचने का मामला सामने आया. उन्होंने कहा कि इस तरह के कोई मामले अब आगे से झारखंड में नहीं होगा.
बता दें कि राज्य सचिवालय को यह जानकारी मिली है कि वर्ष 2015 से लेकर 2018 के बीच 450 से ज्यादा महिलाएं विभिन्न मिशनरीज होम्स में सहारा के लिए आयी थीं, लेकिन सहारा देने के नाम पर उनसे गलत शपथ पत्र भरवा लिया गया. उसके आधार पर बिन ब्याही मां अपने बच्चे पर दावा पेश नहीं कर सकती. जनकारी के मुताबिक राज्यभर के मिशनरीज होम्स में एेसे 280 बच्चों का कोई रिकॉर्ड नहीं है.



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