पीएम नरेंद्र मोदी के निर्देश के चार साल बाद बुधवार को चाईबासा में आयकर विभाग का कार्यालय खोल दिया गया. इसका उद्घाटन बिहार-झारखंड के प्रधान आयकर आयुक्त केसी धुमरिया ने किया. इस मौके पर झारखंड के मुख्य आयकर आयुक्त पी महालिंगम और जमशेदपुर के आयकर आयुक्त सहित बिहार-झारखंड के कई आयकर विभाग के अधिकारी, चैम्बर ऑफ कॉमर्स के सदस्य और स्थानीय व्यवसायी मौजूद रहे. चाईबासा के तांबो चौक के पास आयकर विभाग का भव्य कार्यालय खोला गया है. यहां चाईबासा और चक्रधरपुर के छोटे-बड़े व्यवसायियों के साथ आयकर रिटर्न भरने वालों को काफी सहूलियत होगी.
आयकर विभाग का कार्यालय खुलने से जहां ईमानदारी से व्यवसाय करने और आयकर रिटर्न भरने वालों को आसानी होगी, वहीं कालाधन जमा करने वाले अब आयकर विभाग की नजर से बच नहीं पाएंगे.
पत्रकारों से बात करते हुए प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त ने आयकर नहीं भरने वाले लोगों को चेतावनी भी दी. प्रधान मुख्य आयुक्त ने कहा कि चाईबासा में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो व्यवसाय तो चाईबासा में करते हैं, लेकिन टैक्स बचाने के लिए मुख्यालय कोलकता में बना रखा है. उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवसायी जल्द सतर्क हो जाएं, अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
प्रधान आयुक्त ने कहा कि चाईबासा में कोल लिंकेज के नाम पर दो नंबर के धंधे की जानकारी मिली है. इस पर विभाग की कड़ी नजर है और जल्द ही ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि चाईबासा में 38 हजार पैन कार्ड हैं. लेकिन सिर्फ 24 हजार लोग ही रिटर्न फाइल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे सभी लोगों को जागरूक किया जाएगा.
प्रधान आयुक्त ने कहा कि नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद आयकर विभाग की भूमिका बदल गई है. अब यह विभाग की तरह नहीं सर्विस एजेंसी की तरह काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि विभाग काफी सतर्क और तत्पर हो गया है. आयकर विभाग की नजर से अब कोई नहीं बच सकता है. उन्होंने कहा कि लोगों को टैक्स भरना ही होगा. इसके लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार-झारखंड में अब तक 24 सौ कंपनियों की पहचान की गई है. उन्होंने कहा कि आयकर विभाग ने पिछले साल बिहार-झारखंड में 300 करोड़ कालेधन की चोरी को पकड़ा, जो एक रिकॉर्ड है.
आयकर विभाग का क्षेत्रीय स्तर का कार्यालय खुलने का चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने स्वागत किया है. चैम्बर के अध्यक्ष ने कहा कि चाईबासा में कार्यालय खुलने से जहां व्यवासियों को समय की बचत होगी,
वहीं विभाग और व्यवसायियों के बीच समन्वय भी स्थापित होगा.



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