पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की यादें शेष रह गईं. उनकी अस्थियों को स्वर्ण रेखा नदी में विसर्जित कर दिया गया. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उनकी अस्थियों को विसर्जित कर झारखंड के लिए उनके योगदान को याद किया. इससे पहले भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लम्बी यात्रा तय कर उनकी अस्थियों को नामकोम लाए.

भारत रत्न जनप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों को झारखंड की प्रमुख नदियों में से एक स्वर्ण रेखा नदी में गुरुवार को पूरी श्रद्धा के साथ विसर्जित कर दिया गया. दिल्ली से लाये गये पांच अस्थि कलश में से एक को रांची की स्वर्ण रेखा नदी में विसर्जित करना था. इसके लिए 22 अगस्त को दिल्ली से अस्थि कलश रांची आया. सभी लोगों ने अटलजी को श्रद्धांजलि दी.

23 अगस्त को यह अस्थि कलश यात्रा रांची स्थित बीजेपी ऑफिस से नामकोम के लिए खुली जीप में निकली. प्रदेश भाजपा कार्यालय से बड़ी संख्या में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता पदयात्रा करते हुए स्वर्ण रेखा नदी के तट पहुंचे. मुख्यमंत्री रघुवर दास भी इस यात्रा में शामिल हुए. अटल जी अमर रहेंगे, जब तक सूरज चांद रहेगा, अटलजी आपका नाम रहेगा, ऐसे नारों के बीच यात्रा चलती रही. जैसे- जैसे काफिला बढ़ता गया, भीड़ बढ़ती गई. मुख्यमंत्री ने अटलजी की अस्थियों को स्वर्ण रेखा नदी में विसर्जित किया. पार्टी के नेता और सरकार के मंत्री भी इस मौके पर मौजूद रहे. उनके विचारों को संरक्षित रखने का संकल्प दोहराया.

इस श्रद्धांजलि यात्रा में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता काफी संख्या में शामिल हुए. अस्थि कलश यात्रा को देखने और पुष्पांजलि के लिए सड़कों के किनारे काफी संख्या में लोग पुरुष, महिला, बच्चे सभी वर्ग के लोग थे. प्रदेश के कई हिस्से से लोग आए थे. अस्थि कलश विसर्जन का कार्यक्रम पांच नदियों के लिए निर्धारित किया गया है. दक्षिणी छोटानागपुर के लिए यह कलश यात्रा थी. इसमें प्रमंडल के सभी जिलों के पार्टी के अध्यक्ष,पदाधिकारी के अलावा मंत्री सीपी सिंह, नीरा यादव, विधायक गंगोत्री कुजूर और प्रदेश पदाधिकारी शामिल हुए. प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश, रांची के सांसद रामटहल चौधरी के अलावा संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह भी मौजूद थे. केंद्रीय राज्यमंत्री सुदर्शन भगत भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए. सभी अटल जी के प्रति अपनी भावना व्यक्त कर रहे थे.



झारखंड पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का ऋणी है, क्योंकि उनके ही प्रयास से झारखंड अलग राज्य बना. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने यहां की जनता से वादा किया था कि अगर उन्हें सांसद मिलेंगे तो वे झारखंड राज्य बनाएंगे. जनता ने उनकी मांग पूरी की थी और साल 2000 में अलग राज्य झारखंड बना. इसलिए झारखंड के लोगों का अटलजी के प्रति विशेष श्रद्धा है.
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