झारखंड विकास मोर्चा के सिंबल पर विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल छह विधायकों के दलबदल मामले की शुक्रवार को विधानसभा न्यायाधिकरण में सुनवाई हुई. बाबूलाल मरांडी की याचिका पर चल रहे इस मामले में वादी पक्ष की ओर से बहस शुरू हुआ.

न्यायाधिकरण के समक्ष वादी पक्ष के वरीय अधिवक्ता आरएन सहाय ने संविधान के दसवीं अनुसूची और झारखंड विकास मोर्चा के संविधान के प्रावधानों का हवाला देने के साथ साथ बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए गए गवाहों की वैधानिकता पर सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा कि कुल 78 गवाहों में से 52 झाविमो कार्यसमिति के सदस्य नहीं थे. 16 ने गवाही ही नहीं दी. उन्होंने 8 फरवरी 2015 को केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक की वैधानिकता पर सवाल खड़ा किया और भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष के पत्र का हवाला दिया. साथ ही साथ भाजपा नेता जो पहले झाविमो कार्यसमिति के सदस्य थे उनकी गवाही का जिक्र करते हुए कहा कि पूरा केस शीशे की तरह साफ है कि छहों विधायकों ने दल बदल किया था.

वहीं दूसरी तरफ बचाव पक्ष के वरीय अधिवक्ता जेपी झा ने कहा कि अभी वादी का बहस चल रहा है. वादी पक्ष के बहस की समाप्ति के बाद ही बचाव पक्ष की तरफ से वादविवाद किया जाएगा. स्पीकर ने इससे पहले देश के अलग अलग सक्षम न्यायालयों के फैसलों की कॉपी प्रस्तुत करने का निर्देश वादी पक्ष को देते हुए सुनवाई की अगली तिथि सात सितम्बर मुकर्रर कर दी
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