झारखंड में बाल विवाह की स्थिति अच्छी नहीं है. पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और बिहार के बाद बाल विवाह के मामले में झारखंड देश में तीसरे नम्बर पर है. ऐसे में सूबे को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने यूनिसेफ के साथ मिलकर एक कार्य योजना तैयार की है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को इस कार्य योजना का विमोचन किया.

कार्य योजना में बाल विवाह को रोकने और उनके कारणों के निवारण को लेकर कई कदम शामिल हैं. दरअसल सूबे में बच्चियों की कम उम्र में शादी हो जा रही है. इससे कुपोषण, मातृ मृत्युदर और बाल मृत्यु दर को भी बढ़ावा मिल रहा है. इस मौके पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और लक्ष्मी लॉडली योजना का लाभ बच्चियों को नहीं मिलने की शिकायत पर सीएम ने इन दोनों योजनाओं को बंदकर नये साल में नई योजना, मुख्यमंत्री सुकन्या योजना शुरू करने की घोषणा की. इससे बच्चियों के पढ़ाई और पालन पोषण के लिए अभिभावकों पर बोझ नहीं पड़ेगा.

बाल विवाह से जुड़े आंकड़ों की बात करें तो झारखंड की तस्वीर काफी भयावह है. यह प. बंगाल और बिहार के बाद देश में तीसरे नम्बर पर है. सूबे के पांच जिले गोड्डा, गढवा, देवघर, गिरिडीह और कोडरमा में बाल विवाह की दर पचास प्रतिशत से ज्यादा है. यह राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है. मुख्यमंत्री ने इसको लेकर अधिकारियों को रोडमैप बनाकर काम करने की नसीहत दी. वहीं बाल विवाह को रोकने को लेकर राज्य सरकार की पहल की यूनिसेफ की कंट्रीहेड ने तारीफ की और उम्मीद जताई कि झारखंड जल्द बाल विवाह मुक्त राज्य बनेगा. इस मौके पर विभागीय मंत्री लुइस मरांडी ने भी सम्बोधित किया.

बाल विवाह को रोकने की राज्य सरकार की कार्ययोजना में बच्चियों के स्वास्थ्य, शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास पर जोर दिया गया है. इसके अलावा बाल विवाह को लेकर समाज में बदलाव लाने के लिए जागरुकता अभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया है.
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