धनबाद नगर निगम में डीजल और ई-गवर्नेंस उपकरण खरीद के दो बड़े घोटाले उजागर हुए हैं. एक मामले में नगर विकास विभाग ने जांच की तो आठ करोड़ रुपया के गड़बडी का मामला प्रकाश में आया. इस मामले में में धनबाद के तत्कालीन पूर्व नगर आयुक्त मनोज कुमार, तत्कालीन उप नगर आयुक्त अनिल यादव, तत्कालीन अपर नगर आयुक्त प्रदीप कुमार, तत्कालीन एआरएस मनीष कुमार, जेई हरिश चंद्र पाण्डेय और लेखापाल अनिल कुमार मण्डल के खिलाफ आरोप पाए गए हैं. धनबाद उपायुक्त ए.डोड्डे ने सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है.
वहीं धनबाद नगर आयुक्त चन्द्र मोहन कश्यप ने नगर निगम में साफ सफाई के इस्तेमाल में आने वाले ट्रैक्टर में करीब 9 लाख 45 हजार रुपया के डीजल घोटाले को भी पकड़ा है. प्रेट्रोल पंप कर्मी से मिलकर नगर निगम के वाहन चालको ने फर्जी बिल देकर उक्त राशि का बंदर-बांट किया गया है. नगर आयुक्त ने अनुसार पूरे मामले की जांच कराई गयी तो गडबरी पकड़ में आई इस मामले में चार ट्रैक्टर और टिपर चालको को हटा दिया गया है तो एक को शो-कॉज किया गया है. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सभी को सेवामुक्त किया जाएगा.
इतना बड़ा घोटाला सामने आने के बाद झरिया, छाताटांड़ व कतरास अंचल में भी डीजल की खपत की जांच शुरू की गई है. दरअसल सफाई मद में धनबाद अंचल में प्रतिमाह साढ़े नौ लाख रुपये का डीजल खर्च दिखाया जाता था. पिछले साल तक निगम के पदाधिकारी व ड्राइवर की सांठगांठ से यह खेल चलता रहा. इस बीच अनीश कुमार को धनबाद अंचल का कार्यपालक पदाधिकारी बनाया गया. इनके नेतृत्व में डीजल में चल रही हेराफेरी की जांच शुरू की गई. जांच के क्रम में पाया गया कि गाड़ी में डीजल डालने के लिए विभाग से रसीद तो ली जाती थी, लेकिन गाड़ी में डीजल नहीं डाला जाता था.



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