झारखंड के दक्षिण-पश्चिम भाग में स्थित है लोहरदगा. लोहरदगा का शाब्दिक अर्थ होता है खनिज का क्षेत्र. सम्राट अकबर पर लिखी पुस्तक आइन-ए-अकबरी में भी किस्मत-ए-लोहरदगा का उल्लेख है. कहा जाता है कि भगवान महावीर इस इलाके में ठहरे थे. जिस स्थान पर भगवान महावीर ठहरे थे, उसे 'लोर-ए-यादगा' के नाम से जाना जाता है. स्थानीय मुंडारी भाषा में इसका मतलब आंसुओं की नदी होता है. यहां प्रागैतिहासिक काल के मानव बस्तियों के भी अवशेष मिले हैं, जिससे इसकी पुष्टि होती है कि यहां हजारों साल पहले भी इंसानी सभ्यता थी.
लोहरदगा में बॉक्साइट- लिग्नाइट का भंडार
लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र का पूरा इलाका वन, पहाड़ और पठार से भरा हुआ है. इस इलाके में बॉक्साइट और लिग्नाइट प्रचूर मात्रा में पाये जाते हैं. बावजूद इसके इलाके की पहचान आर्थिक रूप से पिछड़े इलाके के रूप में होती है. यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति बहुल इलाका है और यह सीट एसटी के लिए आरक्षित है. लोहरदगा सीट रांची, गुमला और लोहरदगा जिले में फैला हुआ है. लोहरदगा, रांची का मांडर और गुमला जिले का गुमला, विशुनपुर और सिसई मिलकर लोहरदगा संसदीय क्षेत्र बना है. लोहरदगा लोकसभा सीट में पड़ने वाले सभी विधानसभा क्षेत्र भी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. बीते 25 वर्ष के चुनाव पर नजर डालें, तो यहां कांग्रेस- बीजेपी के बीच टक्कर होती रही है. पिछले दो चुनावों में बीजेपी के सुदर्शन भगत ने जीत दर्ज कराई है. सुदर्शन भगत मोदी सरकार में मंत्री भी हैं.



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