बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के सामने गोड्डा सीट बचाने की बड़ी चुनौती है. वह तीसरी बार यहां से चुनावी मैदान में हैं. लेकिन इस बार प्रतिद्वंद्वी बदला हुआ है. जेवीएम के प्रदीप यादव से उनका सीधा मुकाबला है. प्रदीप यादव गोड्डा के पोड़ैयाहाट के विधायक हैं. महागठबंधन के तहत यह सीट जेवीएम को मिली, जिसके बाद पार्टी ने प्रदीप यादव को दंगल में उतारने का फैसला लिया. हालांकि कांग्रेस के फुरकान अंसारी अंतिम समय तक टिकट के लिए जोर लगाते रहे.

दो बार गोड्डा सीट से जीते

इससे पहले 2009 और 2014 में कांग्रेस के फुरकान अंसारी को ही हराकर निशिकांत दुबे लगातार दो बार बीजेपी सांसद के रूप में संसद पहुंचे. 2009 में ही निशिकांत सियासत की ओर मुड़े. इससे पहले वह एस्सार कंपनी में निदेशक के पद पर कार्यरत थे. बिहार के भागलपुर में जन्मे निशिकांत दुबे ने झारखंड के गोड्डा को अपनी सियासी कर्मभूमि बनाई.

एमबीए करने के बाद एस्सार में बने निदेशक



निशिकांत दुबे का जन्म भागलपुर के भवानीपुर में 28 जनवरी 1969 को हुई. भागलपुर में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए देवघर आ गये. मारवाड़ी कॉलेज, भागलपुर से स्नातक करने के बाद उन्होंने फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, दिल्ली से एमबीए की डिग्री हासिल की. इसके बाद एस्सार में निदेशक के रूप में काम किया.

राजनीतिक प्रोफाइल बनाना आसान नहीं- निशिकांत

कॉरपोरेट जगत से सियासत में आने के सवाल पर निशिकांत दुबे कहते हैं कि किसी के लिए भी राजनीतिक प्रोफाइल बनाना आसान नहीं होता है. जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने अपनी राजनीतिक और कॉरपोरेट जीवन शैली को कैसे मैनेज किया, तो उनका कहना था कि एस्सार इस दिशा में हमेशा सहायक रही. इसलिए कभी हितों का टकराव नहीं हुआ.



2009 में कॉरपोरेट से सियासत में आए 

देवघर प्रवास के दौरान निशिकांत अपने मामा से प्रभावित हुए. यहीं से उनके मन में सियासत में जाने की इच्छा जगी. उनके मामा जनसंघ देवघर इकाई के पार्टी अध्यक्ष थे. जबकि पिता राधेश्याम दुबे एक कम्युनिस्ट थे. इन सबके बीच निशिकांत एबीवीपी के रास्ते पहले भाजयुमो के सदस्य बने, फिर भाजपा में शामिल हो गए. 2009 में सक्रिय राजनीति में आने के बाद उन्हें गोड्डा सीट से बीजेपी का टिकट मिल गया. और पहले संसदीय चुनाव में जीत भी मिल गई. उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता फुरकान अंसारी को मात दिया था. 2014 में एक बार फिर बीजेपी के टिकट पर उन्होंने फुरकान अंसारी को हार का स्वाद चखाया.

17 साल की पहचान को विवाह में बदला

निशिकांत दुबे ने अनामिका गौतम से प्रेम विवाह किया. दोनों एक-दूसरे को बचपन से जानते थे. जब अनामिका निफ्ट में पढ़ती थीं और निशिकांत एस्सार में काम करते थे. उसी दौरान दोनों ने अपने रिश्ते को अगले स्तर पर ले जाने का फैसला लिया. आज दोनों का भरापूरा परिवार है. दो बेटे हैं. दोनों सिंगापुर में पढ़ाई कर रहे हैं.
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