चतरा में सीसीएल की मगध परियोजना बंद है. इससे सीसीएल प्रबंधन को तकरीबन ढाई करोड़ रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है. वहीं आस-पास के करीब सात सौ परिवारों के समक्ष बेकारी का संकट छा गया है. हालांकि प्रबंधन के अधिकारी का कहना है कि मुख्य समस्या जमीन अधिग्रहण का है, जिसे दूर करने का प्रयास चल रहा है.

चतरा जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित मगध परियोजना में गत पांच मई से कोयला उत्पादन ठप है. यहां रोजाना 25 हजार टन कोयले का उत्पादन होता था. उत्पादन बंद होने के कारण आस-पास के सैकङों युवा बेरोजगार हो गये हैं. गांव के लोगों का कहना है कि सीसीएल प्रबंधन एवं जिला प्रशासन को पहल कर जमीन की समस्या का निबटारा करना चाहिए.

उत्पादन ठप होने की मुख्य वजहें खदान के पास में श्मशान की जमीन होना, भू- रैयतों को वन पट्टा नहीं मिलना एवं मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. दरअसल तीन वर्ष पहले यहां मगध परियोजना की शुरुआत हुई थी. उस वक्त सीसीएल प्रबंधन ने ग्रामीणों को सब्जबाग दिखाकर काम शुरू कर दिया. लेकिन तीन साल के बाद अब ग्रामीण ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.

मगध परियोजना में आउट सोर्सिंग कम्पनी के अधिकारी श्री निवास रेड्डी ने बताया कि जमीन अधिग्रहण के चलते मामले फंसा हुआ है. लेकिन इसका जल्द निबटारा हो जायेगा.



परियोजना क्षेत्र के मुखिया सीता देवी का कहना है कि क्षेत्र में काफी समस्याएं हैं, जिसे सीसीएल प्रबंधन को हर हाल में दुरुस्त करना होगा.

सीसीएल की मगध परियोजना बंद होने से देवलगड्डा, मासीलौंग, चमातू, आरा, फूलवसिया, जमुनिया टांह सहित आस-पास के गांवों में बेराजगारी के बादल मंडरा रहे हैं. इन गांवों के करीब सात सौ युवक परियोजना में काम करते थे.
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