लोकसभा चुनाव में हुई करारी हार के बाद झारखंड महागठबंधन के अंदर चल रहा खटास बढ़ता जा रहा है. हार की समीक्षा में जुटे झारखंड मुक्ति मोर्चा विधानसभा चुनाव 2019 में गठबंधन के अंदर बड़े भाई की भूमिका चाहता है. झामुमो ने यह संकेत दे दिया है कि उसी के नेतृत्व में चुनाव लड़ी जाएगी. इधर हेमंत सोरेन के इस बयान पर कांग्रेस ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि बड़ी पार्टी की हिस्सेदारी बड़ी होगी और छोटी पार्टी का हिस्सा छोटा होगा.
महागठबंधन का नेतृत्व चाहता है झामुमो
लोकसभा चुनाव में हुई करारी हार को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा के अंदर मंथन का दौर शुरू हो गया है. पहले दिन गुरुजी शिबू सोरेन की अध्यक्षता में जेएमएम विधायकों की बैठक हुई. करीब तीन घंटे तक जेएमएम विधायकों की हुई इस बैठक में लोकसभा चुनाव परिणाम को लेकर चर्चा होती रही. लोकसभा चुनाव से सबक लेते हुए जेएमएम ने विधानसभा चुनाव मजबुती के साथ लड़ने का एलान किया. नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने महागठबंधन से अपील की है कि झामुमो के नेतृत्व में चुनाव लड़ी जाए. इधर हेमंत सोरेन के बयान से महागठबंधन के अंदर खलबली मच गई है.
झामुमो के नेतृत्व पर कांग्रेस को आपत्ति
कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय ने आपत्ति जताते हुए कहा कि बदले हुए परिस्थिति में पुनर्विचार करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि बड़ी पार्टी की भागीदारी ज्यादा होगी और छोटी पार्टियों की हिस्सेदारी छोटी. उन्होंने कहा कि महागठबंधन की बैठक में जब तक इसका निर्णय नहीं हो जाता तब तक चुनावी रणनीति की बात करना जल्दबाजी होगी.
महागठबंधन के भविष्य पर सवाल
बड़े भाई की भूमिका को लेकर अभी से उठ रहे सवाल ने महागठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है. दरअसल लोकसभा चुनाव में हुई हार के बाद जेएमएम की विधानसभा चुनाव को लेकर चिंता बढ़ गई है. क्षेत्रीय दल होने के कारण झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए विधानसभा चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं है. शायद यही वजह है कि अपने विधायकों से फीडवैक लेने के बाद सोमवार को जेएमएम ने केन्द्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाई है. लोकसभा चुनाव की समीक्षा के बहाने महागठबंधन के दलों की बैठक बुलाने की तैयारी चल रही है. बैठक में विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति बनाई जाएगी.



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