अशोक कुमार शर्मा :-
जब ब्रिटिश हुकूमत की आग में देश जल रहा था उस समय लाल बाबा हेम्ब्रम के अगुआई में देश भक्त संताल भारत माता के नाम अपने को बलदान देने के लिए कतारों में खड़े हो उठे थे ।वह वर्ष था 1942 का ।इतिहास में वर्ष 1942 को क्रांति वर्ष भी कहा गया है ।वर्तमान के अलग राज्य झारखण्ड की धरती पर स्थित हजारीबाग जिले के गोला थाना क्षेत्र अन्तर्गत पड़ने वाला गांव नेमरा में क्रांति वर्ष के मार्च महिने के शिब रात्री के दिन माता सोनामुनि हेम्ब्रम के कोख से गरीबों का मसीहा कहे जाने वाले शिबू सोरेन का जन्म हुआ ।शिबू के अलावे माता सोना मुनी ने राजा राम सोरेन ,शंकर सोरेन ,लालू सोरेन और रामू सोरेन जैसे चार पुत्ररत्नों के साथ दो पुत्री सखी सोरेन व शकुंतला सोरेन को जन्म दी ।शिबू के पिता शोबरन माझी एक शिक्षक थे पर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ इनके भी अंदर आग सुलग रही थी ।मजबुरियों से जुझ रहे शोबरन माझी अंदर ही अंदर महाजनी प्रथा तथा सुदखोरों के खिलाफ आन्दोलन छेड़ दी गई जो आग की तरह फैल गई ।एक दिन ऐसा हुआ कि महाजनों द्वारा शोबरन की हत्या करवा दी गयी वह वर्ष था 1957 का ।पिता की हत्या के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टुट पड़ा ।शिबू इस घटना को सहन नहीं कर सके और एक दिन घर से निकल पड़े ।शिबू ने भी पिता के पद चिन्हों पर चल कर मानों कसम खा ली की उन्हें भी गरीबों पर हो रहे जुल्म व अत्याचार के खिलाफ आवाज उठानी होगी और वे इसी सोच के सहारे आगे की ओर बढ़ते रहे ।शिबू एक उभरे हुए नेता हैं ।उनकी त्याग ,तपस्या ने समाज के तमाम गरीब ,शोषित ,पीडित वर्गों को अपनी ओर आर्कषित करने में सफल रहे जो शिबू सोरेन के लिए अपनी जान भी देने के लिए हमेशा तैयार रहे ।धिरे धिरे शिबू अपने मंजिल की ओर बढ़ते रहे । कहा जाता है कि शिबू सोरेन केआन्दोलन से झारखंड के हरिजन ,आदिबासी ,अल्पसंख्यक एवं कमजोर वर्ग तो कया पशु पक्षी झाड़ जंगल सभी शिबू को अपने बीच पाकर गौरान्वित तथा आनंद विभोर हो उठते थे ।शिबू सोरेन को लेकर मत भिननता पायी जाती है ।पर ऐसा कहा जाता है कि संताल समाज में मान्यता रही है की शिबू सोरेन को मारांग बुरु एवं जाहेर ऐरा दर्शन दिये है और उन्हें आर्शीवाद देकर कहा गया है कि तुम गरीबों के उद्धार के लिए अहिंसात्मक लड़ाई छेड़ो ।किसी किसी का मानना है की शिबू सोरेन सिद्धो कान्हू के प्रति मूर्ति हैं ।जो हो एक समय था जब शिबू सोरेन के दर्शन एवं उनकी वाणी सुनने के लिए हजारों लाखों की संख्या में संताल ,हरिजन ,कमजोर वर्ग के हिन्दु मुसलमान उनकी सभा में एकत्रित होते रहे हैं और उनके भाषण को आधी आधी रातों तक घ्यान से सुनते रहें हैं यह सिलसिला आज भी जारी है ।माना जाता है कि संताल विद्रोह के अग्रणी नेता सिद्धो कान्हू को जिस प्रकार मारांग बुरु तथा जाहेर ऐरा द्वारा आन्दोलन चलाने के लिए दर्शन दिया गया था उसी प्रकार शिबू सोरेन को भी दोनों भगवान द्वारा दर्शन प्राप्त हैं ।क्रमश:



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