नीति आयोग की रिपोर्ट के संदर्भ में झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने राज्य का रिपोर्ट कार्ड पेश किया. उन्होंने बताया कि सूबे में 57.15 लाख परिवारों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया गया है. यह राज्य की आबादी का 91 फीसदी है. वहीं इस योजना में गड़बड़ी करने वाले 20 अस्पतालों के लाइसेंस को निलंबित किया गया है. 25 अस्पतालों से जुर्माना भी वसूला गया है. दो अस्पतालों को इस योजना से बाहर कर दिया गया है.
झुग्गी- झोपड़ियों में होगा मोहल्ला क्लीनिक
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि नवजात शिशुओं के लिए बेबी केयर किट योजना शुरू की जाएगी. इसके अलावा 104 हेल्थ हेल्पलाइन सर्विसेज और ममता वाहन योजना को भी शुरू किया जाएगा. शहरी झुग्गी- झोपड़ियों में मोहल्ला क्लीनिक चलाया जाएगा. निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को चेतावनी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ऐसे डॉक्टरों को चिह्नित कर जल्द कार्रवाई होगी.
रिम्स के 8 डॉक्टरों को नोटिस
रिम्स के निदेशक डॉ डीके सिंह ने कहा कि रिम्स के 8 डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस करने को लेकर नोटिस जारी किया गया है. सरकार और रिम्स के स्तर पर दो डॉक्टर चिह्नित किये गये हैं. इनमें से एक को यूनिट इंचार्ज के पद से हटा दिया गया है, तो दूसरे का इंक्रीमेंट रोक दिया गया है.
नीति आयोग की रिपोर्ट में यूपी, बिहार से बेहतर है झारखंड
गौरतलब है कि स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में झारखंड की स्थिति बिहार और यूपी जैसे राज्यों से बेहतर है. नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में सेहत के मामले में झारखंड को 14वां स्थान प्राप्त हुआ. वहीं बिहार को 20वां और यूपी को 21वां स्थान मिला. केरल अव्वल राज्य बनकर उभरा है. दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश और तीसरे पर महाराष्ट्र रहे.
रिपोर्ट में यूपी निचले पायदान पर
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा विश्व बैंक के सहयोग से तैयार नीति आयोग की रिपोर्ट 'स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत' नामक शीर्षक से जारी हुई. इसमें स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राज्यों की रैंकिंग बताई गई. इस रैंकिंग में यूपी सबसे निचले 21वें स्थान पर है. जबकि बड़े राज्यों में गुजरात, पंजाब और हिमाचल प्रदेश चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर रहे.



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