गुमला के सिसई के नगर सिसकारी गांव में चार की लोगों की निर्मम हत्या ने एक बार अंधविश्वास में फंसे समाज की कहानी बयां कर दी. जानकारी के मुताबिक इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने का फैसला चार दिन पहले, बुधवार को ही कर लिया गया था. उस दिन गांव में डायन-बिसाही को लेकर बैठक हुई थी. बैठक में कई लोगों ने अपनी परेशानी के लिए चापा भगत, पत्नी पीरी देवी, सुना उरांव और फगनी देवी को जिम्मेवार ठहराया. साथ ही इन्हें दोषी करार दिया. बाद में बैठक में इनके सफाये का निर्णय लिया  गया. उसी के तहत रविवार तड़के सुनियोजित तरीके से घटना को अंजाम दिया गया.

हमलावरों ने पहन रखा था नकाब
पहचान छुपाने के लिए वारदात में शामिल लोगों ने अपने चेहरे पर नकाब पहन लिए थे. हमलावरों ने चापा भगत, उसकी पत्नी पीरी देवी, सुना उरांव और फगनी देवी को उनके घरों से जबरन बाहर निकाला और गांव के अखरा में लाकर उनकी निर्मम तरीके से पीट-पीटकर हत्या कर दी. घटनास्थल के पास एक गड्ढे से खून से सनी कई लाठियां बरामद की गईं. इससे पता चला कि वारदात में 10 से 12 लोग शामिल थे.



गांव में भय का माहौल 
घटना की सूचना पर जब पुलिस गांव पर पहुंची, तो चारो तरफ भय का माहौल था. कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं थे. पुलिस ने चारों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस के मौजूदगी में परिवारवालों ने शवों को एक साथ दफनाया. गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दी गई है. पुलिस के डर से पुरुष गांव छोड़कर भाग गये हैं.

चार ग्रामीण हिरासत में  
पुलिस ने इस सिलसिले में चार ग्रामीणों को हिरासत में लिया है. उनसे पूछताछ की जा रही है. एसपी अंजनी कुमार झा ने बताया कि यह घटना अंधविश्वास के कारण हुई है. इसमें कुछ गांववालों के शामिल होने का संदेह है. हर एंगल से जांच जारी है. बतौर एसपी अंधविश्वास को लेकर लगातार जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है.

हर साल होती हैं 30-35 वारदातें 
गुमला में डायन-बिसाही के आरोप में हत्या कोई नई बात नहीं है. हर साल यहां 30-35 ऐसी वारदातें होती हैं. पीड़ित परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंचे स्थानीय विधायक व स्पीकर दिनेश उरांव ने कहा कि अंधविश्वास समाज को खोखला कर रहा है. इसे मिठाना जरूरी हो गया है. पूर्व शिक्षामंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि अज्ञानत में की गई इस तरह की घटना को सभ्य समाज कभी नहीं स्वीकार कर सकता. उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग की.
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