झारखंड: देश की राजनीति में विशेष स्थान रखने वाले लालू प्रसाद यादव के बारे में कहा जाता है कि उनकी सियासी समझ इतनी है कि वो सामने वाले के दिल की बात जान लेते हैं. लेकिन झारखंड को लेकर उनकी राजनीतिक समझ हमेशा मात खाती रही है. नवंबर 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य गठन के बाद से लालू यादव ने जिसे वहां का प्रदेश अध्यक्ष बनाया, उन सबने उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को बाय-बाय कर दूसरे दलों का दामन थाम लिया.

 नेताओं की महत्वाकांक्षाओं को परखने में लालू विफल

उड़ती चिड़िया को हल्दी लगाने जैसी कहावत से बिहार-झारखंड की जनता को रिझाने वाले लालू यादव शायद झारखंड के नेताओं की तासीर और उनकी महत्वाकांक्षाओं को परख पाने में अभी तक विफल
रहे हैं. यही कारण है कि झारखंड बनने के बाद आरजेडी के पहले प्रदेश अध्यक्ष अकलू राम महतो से लेकर गौतम सागर राणा तक जितने भी अध्यक्ष बने या लालू यादव ने जिसे प्रदेश की कमान सौंपी, उन सबने पार्टी छोड़ दी.
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