* धारा 370 पर दो नासमझ लोगों ने देश के खिलाफ फैसला लिया
* दोनों व्यक्ति का तानाहाह व अहंकार समझ से परे
* देश को बुद्ध और गाँधी को याद कर भावना को त्याग, विवेकशील होने का किया आग्रह
भागलपुर : मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को लेकर किये गए फैसले पर अंग उत्थान आंदोलन समिति,बिहार-झारखंड सह अंग मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष गौतम सुमन ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला कर उनकी कडी़ निंदा की है। उन्होंने कहा है कि धारा 370 पर दो नासमझ लोगों ने देश के खिलाफ फैसला लिया है। यह मोदी सरकार द्वारा देश के संघीय ढ़ांचे पर सबसे तीखा हमला है। आज केंद्र की सरकार ने संस्कृति, सविंधान, संघीय व्यवस्था और वसुधैव कुटुंबकम के नींव पर सबसे बड़ा चोट किया है। देश का संविधान संघीय व्यवस्था, राज्यों के विचार व सहमति और लोगों की भावनाओं से बना है। तभी हमारा संविधान ताकतवर है,लेकिन आज देश में संविधान पर सबसे बड़ा हमला हुआ है, जिसके तहत न विपक्ष से राय शुमारी और न सदन में चर्चा और न ही जम्मू कश्मीर के लोगों से कोई राय- परामर्श किया गया। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा है कि अगर ऐसे ही देश चलेगा तो संसद,राज्य सभा या विधान सभा की देश में जरूरत ही क्या है और आखिर ये दोनों व्यक्ति अहंकार में इतने बडे़ तानाशाह क्यों होते चले जा रहे हैं?
उन्होंने आगे कहा कि आंध्र प्रदेश की जनता से बगैर राय शुमारी के कांग्रेस ने एक भूल की थी, जिसका हरजना उन्हें भरना पड़ा। आज एक पंचायत का कोई अधिकार छीनता है, तो लोग वहां विरोध पर उतर आते हैं। एक दिन राष्ट्रपति शासन किसी राज्य में लगता है, तो वहां की जनता सरकार को दुश्मन समझने लगती है,लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने तो बिना कश्मीरियों की भावना का कद्र करते हुए उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया। वो भी तब-जब वहां न तो कोई सरकार है और न विधान सभा। तो क्या आने वाले दिनों में देश तोड़ने वाली भाजपा की सरकार पश्चिम बंगाल को भी केंद्र शासित प्रदेश बना देगी ?
उन्होंने कहा कि आज केंद्र सरकार ने सवा करोड़ कश्मीरियों को देश के खिलाफ कर दिया है। उनकी भावनाओं के साथ इस तरह के नाइंसाफी ने देश के प्रति आम लोगों में अविश्वास पैदा करने का काम किया है, जिसकी खिलाफत हम पुरजोर और पूरी मजबूती के साथ करते हैं। उन्होंने कहा कि आज अजीब विडंबना है कि अपने देश से एक राज्य अलग होने पर लोग भावना में बहकर जश्न और उत्सव मनाते हुए खुशियों के तालाब में डुबकी लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे सदैव सोचते हैं कि हर मुद्दे पर बोलने से परहेज करूंगा। अपनी राय जाहिर करते रहना कोई जरूरी है क्या और क्या लोग मेरी भावनाओं को समझ भी पायेंगे? कहा जाता है कि अगर आसपास ज्यादातर लोग नशे में टुल्ल हो तो बजाय इसके कि लोगों को समझाया जाये, खुद ही एक पैग चढ़ा लेना अधिक समझदारी का काम है। मगर फिर कबीर याद आ जाते हैं।
आज जब कश्मीर में फौज की टुकडियां भर कर कश्मीर भंग कर दिया गया और धारा 370 को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू हो गयी तो अनायास ही गांधी याद आ गये।जब मैं स्कूल में था तो किताब के पिछ्ले पन्ने पर गांधी जी का जन्तर छ्पा होता था। उसमें लिखा होता था कि अगर किसी भी फैसले के वक़्त भ्रम की स्थिति हो तो यह देख लेना चाहिये कि तुम्हारे इस फैसले से उस व्यक्ति पर क्या असर पड़ेगा जो सबसे गरीब इन्सान है। मतलब वे हर फैसले को निर्धनतम और संसाधनहीन व्यक्ति की कसौटी पर कसना चाहते थे।अब इस फैसले के बाद जब मेरी टाईम लाईन मुबारकबाद और घटिया चुटकलों से भरी है जब कई समझदार लोगों को इस फैसले को सही बताता देख रहा हूं तो अनायास ही यह सवाल मन में आता है कि क्या कश्मीर का आवाम इस फैसले से खुश होगा?
उन्होंने कहा कि आप और हम आज भले डल झील में छठ मनाने या गुल्मर्ग में प्लॉट खरीदने की बातें कर लें, मगर ज्यादातर लोगों के लिए यह सिर्फ जुबानी चकल्लस होगी। हमारे लिए अमूमन इस बात का कोई मतलब नहीं है कि कश्मीर में 370 रहे या जाये। हमारा जीवन जैसा इस फैसले के पहले था, वैसा ही इस फैसले के बाद भी रहेगा। इस मसले पर हम बस तमाशाई हैं। मगर घाटी के हर व्यक्ति का जीवन इस फैसले के बाद प्रभावित होगा। हर इन्सान इस खबर के बाद खुद को थोड़ा कुचला हुआ महसूस कर रहा होगा लेकिन हम कश्मीरीयों की परवाह क्यों करें ? वे तो आतंकवादी हैं, देश विरोधी हैं, गद्दार हैं और पाकिस्तान परास्त हैं। वे खत्म हो जायें, बला से। हमें क्या। उन्होने जब कश्मीरी पण्डितों को वहां से जबरन खदेड़ दिया था, तब क्या हुआ था। वे तो इसी लायक हैं कि उन्हें दबाकर, गुलाम बना कर रखा जाए।
अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आपके लिहाज से यह फैसला बिल्कुल सही है ।
उन्होंने बताया कि पर वे ऐसा हरगिज नहीं सोचते हैं। क्यों...? क्योंकि चर्चिल एक वक़्त में ठीक ऐसा ही हमारे हिन्दुस्तान के बारे में सोचता था,लेकिन उसकी सोच गलत थी, यह हमने साबित किया है।
लेकिन अब, आजादी के सत्तर साल बाद हम ठीक उसी तरह सोचने लगे हैं, जैसा कभी साम्राज्यवादी अंग्रेज सोचते थे। अब हमें लगने लगा है कि इस दुनिया में सर्वशक्तिमान बनने का यही एक तरीका है। जो आपसे असहमत है,उसे कुचल दो और आगे बढ़ो। उन्होंने कहा कि हम कश्मीर तो चाहते हैं, मगर कश्मीरीयों को नहीं चाहते,हम कश्मीर पर हिन्दुस्तान का पूरा अधिकार तो चाहते हैं लेकिन हमने अपने इतिहास में कभी ऐसा नहीं सोचा कि हम एक ऐसा हँसता खेलता मुल्क बने कि कश्मीर क्या, पाकिस्तान भी हमारा हिस्सा बनने के लिए तरसेऔर वह हमसे यह अनुरोध करे कि हमें भी अपने मुल्क हिन्दुस्तान में शामिल कर लीजिये। उन्होंने कहा कि कश्मीर तो 70 साल से हमारे साथ है। हम कभी कश्मीरीयों को यह अहसास नहीं दिला पाये कि यह तो तुम्हारा अपना मुल्क है। ऐसा वतन कहां मिलेगा। हम तो इस मामले में रावण जैसा धैर्य भी नहीं दिखा पाये कि सीता की हां का इन्तजार करते। हमने जमीन जीतने पर फोकस किया, दिल जीतने की कभी कोशिश नहीं की। ऐसे वक्त पर उन्होंने सम्राट अशोक को याद करते हुए कहां की कलिंग युद्ध के बाद उसने तय किया था कि वह अब सिर्फ धम्म विजय करेगा। आज पूरे ऐशिया में बौद्ध धर्म का पताका लहरा रहा है। चीन, जापान, इंडोनेशिया, मलेशिया, कम्बोडिया, श्रीलंका, म्यांमार इन सब मुल्कों की बड़ी आबादी के गुरु बुद्ध हैं। हजारो साल से हैं। भौगोलिक साम्राज्य मिटते हैं और बनते हैं। मगर दिल पर बने साम्राज्य हमेशा बरकरार रहते हैं।
लेकिन अशोक एक थे और गांधी व बुद्ध भी एक ही थे। उन्होंने बताया कि जब तक मनुष्यता रहेगी, इनके विचार जगमगाते रहेंगे। मेरे जैसे इंसानों को प्रचलित मगर अनुचित बातों के खिलाफ विचार प्रकट करने की हिम्मत देते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि वे असहमत हैं ऐसे मुद्दों पर लोगों की खुशी और उनके ऐसे अश्लील चुटकलों में वे कभी शामिल नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि मुझे कश्मीर में प्लॉट नहीं चाहिये, मुझे कश्मीरी दोस्त चाहिये। कि जब कभी श्रीनगर या गुलमर्ग जाऊं तो मेरे दोस्त का दरवाजा मेरे लिए खुला रहे।



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