रांची । झारखंड विधानसभा में बड़े पैमाने पर हुई नियुक्तियों में घोटाले पर पहली बार सख्त कार्रवाई हुई है। सोमवार की देर रात विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उराव के निर्देश पर विधानसभा सचिवालय ने संयुक्त सचिव स्तर के दो पदाधिकारियों रविंद्र सिंह और राम सागर राम को जबरन सेवानिवृत्ति देने का निर्णय किया। इस बाबत अधिसूचना जारी की गई है। रविंद्र सिंह इसी वर्ष नवंबर माह में रिटायर होने वाले थे, जबकि राम सागर राम की सेवानिवृत्ति सन 2023 में होनी थी।
इन दोनों पर 500 से ज्यादा नियुक्तियों की प्रक्रिया में शामिल रहने का आरोप है। इन्होंने स्क्रूटनी और बहाली की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया। यह नियुक्तिया पूर्व विधानसभा अध्यक्ष आलमगीर आलम और इंदर सिंह नामधारी के कार्यकाल में हुई थी। गौरतलब है कि नियुक्ति घोटाले में कोई सख्त कार्रवाई होने में 10 साल से ज्यादा का वक्त लग गया।
राज्य सरकार ने जस्टिस विक्रमादित्य आयोग का गठन नियुक्ति घोटाले की जांच के लिए किया था। अलग-अलग बिंदुओं पर आयोग ने एक वर्ष पूर्व राज्यपाल को पूरी रिपोर्ट सौंपी थी। आयोग की रिपोर्ट में बिंदुवार उन तमाम अनियमितताओं का जिक्र किया गया था जो नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान की गई बड़े पैमाने पर धाधली की पुष्टि करते हैं। जबरन सेवानिवृत्त किए गए दोनों विधानसभा के पदाधिकारी 1988 बैच के हैं। बिहार से झारखंड के अलग होने के बाद दोनों ने झारखंड विधानसभा में योगदान दिया था। दो पदाधिकारियों पर नियुक्ति के बाद इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों में हड़कंप मच गया है।
बैकडोर से कर ली थी नियुक्ति
रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा में उन कर्मियों की बैकडोर से नियुक्ति कर दी गई थी, जिन्हें बिहार विधानसभा में हटा दिया गया था। राज्य गठन के बाद हटाए गए कर्मी यहा फिर से बहाल हो गए। आयोग ने इन सभी को बर्खास्त करने के साथ-साथ मामले में दोषी सभी लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की अनुशंसा की है। इसी कड़ी में पहली कार्रवाई हुई है।
राज्यपाल से स्वीकृत फाइल में भी छेड़छाड़
विधानसभा के तत्कालीन प्रभारी सचिव अमरनाथ झा ने राज्यपाल से स्वीकृत फाइल में भी छेड़छाड़ कर दी थी। विधानसभा सहायकों के 75 सहायकों के पद सृजन की फाइल में यह छेड़छाड़ हुई। आयोग ने जाच के क्त्रम में उसमें तेरह जगहों पर छेड़छाड़ पाई। इसकी पुष्टि राजभवन से भी कराई गई। सहायकों के 75 पद थे, कर दिए 150 राज्यपाल ने विधानसभा में 75 पदों के पद सृजन की स्वीकृति दी थी। लेकिन विधानसभा के तत्कालीन प्रभारी सचिव अमरनाथ झा ने उसे 75 प्लस 75 कर दिया। इससे गजट में कुल 150 पद सृजित हो गया।
सैयद अहमद ने दिया था जाच का आदेश
तत्कालीन राज्यपाल डॉ. सैयद अहमद ने विधानसभा नियुक्ति, प्रोन्नति घोटाले की जाच का आदेश दिया था। सबसे पहले जस्टिस लोकनाथ प्रसाद की अध्यक्षता में यह जाच आयोग गठित की गई थी। लेकिन बाद में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। इस जाच आयोग के कार्यकाल का कई बार अवधि विस्तार हुआ।



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