रांची। झारखंड एक बार फिर विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है। तमाम तैयारियां जोरों पर चल रही है। चुनाव आयोग ने भले ही अभी तारीखों का एलान न किया हो, लेकिन राज्य इकाई पुख्ता प्रबंधों के साथ एक-एक अफसरों को उनकी जिम्मेवारी सौंपने में जुटी है। संभावना जताई जा रही है कि अक्टूबर के दूसरे हफ्ते तक भारत निर्वाचन आयोग झारखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा कर सकता है।
इधर राजनीतिक दलों में भी चुनाव को लेकर बेताबी बढ़ रही है। नेता-कार्यकर्ता में वोटरों को साधने की प्रतिस्पर्द्धा पूरे रौ में आ गई है। अबकी बार हर कोई अपनी पार्टी की सरकार बनाने का दावा कर रहा है। मुख्यमंत्री बनने की इस होड़ में सत्तारुढ़ दल भाजपा की ओर से जहां मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कमान संभाल रखा है। वहीं मुख्य विपक्षी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से हेमंत सोरेन अपनी आजमाइश में जुटे हैं। झारखंड विकास मोर्चा की ओर से बाबूलाल मरांडी भी बीते दिन शुरु किए गए जनादेश समागम के जरिये रेस में आ गए हैं।
कांग्रेस की बात करें तो भारी-भरकम लाव-लश्कर के बावजूद पार्टी ने अब तक कोई चुनावी अभियान नहीं छेड़ा है। अध्यक्ष रामेश्वर उरांव और पांच कार्यकारी अध्यक्ष की टीम परंपरागत वोटरों पर ही भरोसा करती दिख रही है। जदयू और राजद की ओर से जिला मुख्यालयों में कार्यकर्ता सम्मेलन किया जा रहा है। जबकि वामपंथी पार्टियां व अन्य दूसरे दल भी अपने-अपने तरीके से वोटरों का मिजाज भांपने में जुटे हैं।



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