रांची। समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्य कर रहे 63 हजार पारा शिक्षकों को स्थायी करने तथा उन्हें मानदेय देने पर अब नई सरकार में ही कोई भी निर्णय संभव है। राज्य सरकार ने इनके नियोजन एवं वेतनमान देने को लेकर नियमावली का ड्राफ्ट तो तैयार कर लिया है, लेकिन इस पर 10 नवंबर तक सभी पारा शिक्षकों से सुझाव मांगा गया है। ऐसे में तय है कि तबतक विधानसभा चुनाव को लेकर आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इस दौरान इसपर कोई भी निर्णय नहीं हो सकेगा।

इधर, पारा शिक्षकों ने नियमावली पर अपना अलग-अलग सुझाव देना शुरू कर दिया है। एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने भी प्रस्तावित नियमावली के कई प्रावधानों का विरोध करते हुए इसमें व्यापक सुधार की मांग की है। मोर्चा का कहना है कि यह नियमावली हूबहू लागू हुई, तो 60 हजार पारा शिक्षकों की नौकरी ही चली जाएगी। पारा शिक्षकों ने प्रस्तावित नियमावली को पारा शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी बताया है।

अब चुनाव के बाद ही आंदोलन
पारा शिक्षक इस प्रस्तावित नियमावली के विरोध में एक बार फिर आंदोलन का निर्णय ले सकते थे, लेकिन विधानसभा चुनाव के कारण वे इसे लेकर कोई कदम उठा नहीं सकते। ऐसे में पारा शिक्षक चुनाव के बाद नई सरकार के समक्ष ही आंदोलन का कोई निर्णय ले सकते हैं।

भुनाने में लगे हैं राजनीतिक दल
पारा शिक्षकों की बड़ी संख्या को देखते हुए सभी विपक्षी राजनीतिक दल इनके आंदोलन को मुद्दा बना रहे हैं। बुधवार को रांची में कांग्रेस की आयोजित प्रमंडलीय 'जन आक्रोश रैली' में भी नेताओं ने राज्य सरकार पर पारा शिक्षकों के साथ वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया था।
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